नियुक्तियों पर रार के बीच युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों की छुट्टी
निष्क्रिय पदाधिकारियों पर चला अनुशासन का डंडा
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी और अंर्तकलह की स्थिति एक बार फिर सतह पर आ गई है। पार्टी के भीतर एक ओर जहां नियुक्तियों को लेकर दिग्गजों के बीच खींचतान जारी है, वहीं दूसरी ओर निष्क्रिय पदाधिकारियों पर अनुशासन का डंडा चलना भी शुरू हो गया है। ताजा घटनाक्रम में अनुसूचित जाति विभाग में नियुक्तियों को लेकर मचे घमासान के बाद कुछ जिलाध्यक्षों को बदला गया है, तो वहीं युवक कांग्रेस ने नॉन-परफॉर्मिंग नेताओं पर बड़ी गाज गिराई है।
कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग में नियुक्तियों को लेकर चल रही खींचतान के बीच आखिरकार बड़े नेताओं के समर्थकों को तवज्जो मिली है। ग्वालियर और देवास में पहले घोषित किए गए नामों को बदलकर नई नियुक्तियां की गई हैं। ग्वालियर शहर में विधायक सतीश सिकरवार के प्रभाव के बाद योगेश दंडोतिया की जगह अब केदार सिंह बरहादिया को कमान सौंपी गई है। वहीं देवास ग्रामीण में पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के कड़े रुख के बाद बाने सिंह अस्तेय को हटाकर विजय परमार को नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। जानकारों का मानना है कि पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं के बीच अपने समर्थकों को पद दिलाने की इस होड़ ने अंर्तकलह को सार्वजनिक कर दिया है।
युवक कांग्रेस में प्रदेश पदाधिकारी होल्ड
एक तरफ जहां संगठन में नियुक्तियों को लेकर मल्ल युद्ध जारी है, वहीं दूसरी तरफ काम न करने वाले नेताओं के खिलाफ युवक कांग्रेस ने सख्त रुख अपनाया है। काम नहीं तो पद नहीं की नीति पर चलते हुए प्रदेश प्रभारी सीवी सिंह चौहान ने बड़ी कार्रवाई की है। पार्टी की बैठकों और कार्यक्रमों से लगातार नदारद रहने वाले नेताओं के पदों को होल्ड कर दिया गया है। इसमें प्रदेश महासचिव, प्रदेश सचिव और अलीराजपुर, रतलाम और रीवा के जिला अध्यक्ष शामिल हैं।
इसलिए हुई कार्रवाई
युवक कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के अनुसार, ये पदाधिकारी पद लेने के बाद घर बैठे थे और संगठन की गतिविधियों में उनकी भागीदारी शून्य थी। अनुशासनहीनता और निष्क्रियता को देखते हुए यह कदम उठाया गया है ताकि आगामी चुनावों से पहले संगठन को सक्रिय किया जा सके।
