पहले जनभागीदारी समितियों में मिलेगी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी
निगम-मंडलों में नियुक्तियों पर फिलहाल लगा ब्रेक
भोपाल। प्रदेश की राजनीति में नियुक्तियों को लेकर एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिला है। प्रदेश भाजपा संगठन और सरकार ने आपसी सहमति से फिलहाल निगम-मंडलों में होने वाली नियुक्तियों को टाल दिया है। अब पार्टी की प्राथमिकता जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना है, जिसके तहत सबसे पहले कॉलेजों की जनभागीदारी समितियों में नियुक्तियां की जाएंगी।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच हुई उच्च स्तरीय चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है। हालांकि निगम-मंडलों के लिए नामों की सूची लगभग तैयार हो चुकी थी और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ भी इस पर गहन मंथन हो चुका था, लेकिन अंतिम समय में संगठन ने इस प्रक्रिया को होल्ड करने का निर्णय लिया। सूत्रों का कहना है कि इसके पीछे पार्टी की एक सोची-समझी रणनीति है। संगठन और सरकार के बीच नियुक्तियों को लेकर पूर्ण संतुलन बनाना। बड़े पदों से पहले स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को उपकृत करना। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि नियुक्तियों में हर वर्ग और क्षेत्र का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।
जनभागीदारी समितियां पहली प्राथमिकता
नई गाइडलाइन के अनुसार, नियुक्तियों का सिलसिला अब जनभागीदारी समितियों से शुरू होगा। पार्टी इन समितियों को कार्यकर्ताओं की ऊर्जा के सही इस्तेमाल और स्थानीय स्तर पर पकड़ मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम मान रही है। संगठन का मानना है कि निगम-मंडलों जैसी बड़ी जिम्मेदारियों से पहले जनभागीदारी समितियों के माध्यम से जमीनी कार्यकर्ताओं को अवसर दिया जाए। इससे न केवल संगठन को मजबूती मिलेगी, बल्कि नियुक्तियों की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।
सिंधिया की नाराजगी भी
निगम-मंडलों में नियुक्तियों को लेकर संगठन चाहता है कि सभी वरिश्ठ नेताओं के बीच सामजस्य बनाकर नियुक्यिं की जाएं। मगर अब तक बैठकों में केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ सहमति ना बनना भी नियुक्यिं को टालने का बड़ा कारण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार सिंधिया ने पांच लोगों को निगम मंडल में नियुक्ति दिलवाने के लिए पूरा जोर दिया है। इनमें पूर्व मंत्री इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसोदिया, ओपीएस भदौरिया, गिरिराज दंडोतिया और पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल का नाम शामिल है। सिंधिया दिल्ली से भोपाल तक इसकी लॉबिंग में जुटे है। सूत्रों की मानें तो सिंधिया अपने हारे हुए समर्थकों को मंत्री पद का दर्जा दिलाने की ज़िद पर अड़े है
