कोयले और लकड़ी जलाने पर लगी पाबंदी अस्थायी रूप से हटी
गैस आपूर्ति के लिए नई एसओपी जारी, घरेलू रिफिल के लिए अब 25 दिन का अंतर अनिवार्य
भोपाल। राजधानी में एलपीजी की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब घरेलू उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर लेने के बाद दूसरी बुकिंग के लिए कम से कम 25 दिन का इंतजार करना होगा। प्रशासन ने यह कदम गैस की सीमित उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को देखते हुए उठाया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, इसलिए आम जनता घबराकर अनावश्यक बुकिंग न करे। शहर के होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए प्रशासन ने नरम रुख अपनाया है। सामान्य दिनों में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों के तहत शहर में लकड़ी या कोयले के तंदूर जलाने पर सख्त प्रतिबंध रहता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने इसमें अस्थायी छूट प्रदान की है। अब व्यापारी गैस की खपत कम करने के लिए डीजल स्टोव, इलेक्ट्रिक इंडक्शन और सीमित मात्रा में लकड़ी, कोयले का उपयोग कर सकेंगे।
जमाखोरी करने वालों पर कसेगा शिकंजा
कलेक्टर कार्यालय ने एलपीजी वितरकों को भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। जिसके तहत वितरकों को हर दिन के स्टॉक और वितरण की जानकारी जिला कार्यालय को देनी होगी, यदि कहीं भी गैस की जमाखोरी या कालाबाजारी पाई जाती है, तो संबंधित के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा, होटल संचालकों से अपील की गई है कि वे गैस बचाने के लिए अपने मेन्यू को सीमित रखें और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को प्राथमिकता दें।
यूथ कांग्रेस ने किया प्रदर्शन
यूथ कांग्रेस ने आज राजधानी में एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर अनोखा प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता खाली सिलेंडर लेकर पहुंचे और नाले में पाइप डालकर उसमें गैस भरने की प्रतीकात्मक कोशिश की। यूथ कांग्रेस नेताओं का कहना था कि भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा पहले यह दावा किया गया था कि नाले से गैस बनाई जा सकती है। इसलिए वे उसी बात को दिखाने के लिए यह प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर नाले से गैस बन सकती है तो फिर सिलेंडर भी वहीं से भर जाना चाहिए।
