बिना लाइसेंस आउटसोर्स कर्मचारी रखे तो खैर नहीं
श्रम विभाग ने जारी किए कड़े निर्देश
भोपाल।प्रदेश के सरकारी विभागों, निगम-मंडलों और निर्माण संस्थाओं में आउटसोर्सिंग के नाम पर होने वाली अनियमितताओं को रोकने के लिए श्रम विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। श्रम आयुक्त तन्वी हुड्डा ने सभी विभागाध्यक्षों और प्राधिकरण प्रमुखों को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना वैध पंजीकरण और लाइसेंस के ठेका श्रमिकों की तैनाती करना एक दंडनीय अपराध माना जाएगा।
श्रम विभाग के संज्ञान में आया है कि कई सरकारी महकमों में ठेकेदार और निजी एजेंसियां बिना लाइसेंस के ही कर्मचारी उपलब्ध करा रही हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी विभाग ऐसी एजेंसी को कार्यादेश जारी नहीं करेगा जिसने श्रम विभाग में पंजीयन न कराया हो। एजेंसियों के पास वैध लाइसेंस होना अनिवार्य है। पंजीयन प्रक्रिया में देरी का मुख्य कारण प्रक्रियात्मक जानकारी का अभाव या श्रम कार्यालय को समय पर सूचना न देना पाया गया है।
क्या कहता है कानून
श्रम आयुक्त ने संविदा श्रम अधिनियम के नियमों का हवाला देते हुए वैधानिक स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा है कि कोई भी प्रतिष्ठान जहाँ 50 या उससे अधिक ठेका श्रमिक नियोजित हैं (या पिछले 12 महीनों में रहे हों), वहां मुख्य नियोजक को श्रम विभाग में पंजीयन कराना अनिवार्य है। वहीं धारा 12 के अंतर्गत कोई भी ठेकेदार बिना वैध लाइसेंस प्राप्त किए श्रमिकों की आपूर्ति या नियोजन नहीं कर सकता।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
अक्सर देखा गया है कि सरकारी निर्माण कार्यों और कार्यालयों में ठेका श्रमिकों की तैनाती तो कर दी जाती है, लेकिन वैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करने में कोताही बरती जाती है। श्रम विभाग ने चेतावनी दी है कि इन नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संस्था प्रमुख और ठेकेदार के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
