राज्यसभा चुनाव, नए चेहरों की दावेदारी बढ़ा रही दलों की चिंता
कांग्रेस, भाजपा दोनों ही दलों के दावेदार हुए सक्रिय
भोपाल। प्रदेश की सियासत में गर्मी सिर्फ मौसम की नहीं, बल्कि राज्यसभा की खाली हो रही तीन सीटों की भी है। जून में होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही खेमों में हलचल तेज हो गई है। समीकरणों के लिहाज से दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के पाले में जाना तय माना जा रहा है, लेकिन असली सस्पेंस उम्मीदवारों के नामों को लेकर है। अपनी-अपनी बिसात बिछा रहे नेताओं ने दिल्ली से लेकर भोपाल तक सक्रियता बढ़ा दी है।
कांग्रेस की एक सुरक्षित सीट के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पहले ही राज्यसभा ना जाने के संकेत दे चुके है। सिंह द्वारा दोबारा राज्यसभा न जाने के संकेतों के बाद पार्टी के भीतर नए चेहरों के लिए दरवाजे खुल गए हैं। सिंह के बाद प्रमुख दावेदारों में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। वहीं युवा और अनुभवी विकल्प के तौर पर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव’ और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन भी दौड़ में शामिल हैं। इनके अलावा पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल भी दिल्ली में अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं। अगर जातीय समीकरण को बैठाते हुए यदि कांग्रेस दलित कार्ड खेलती है, तो सज्जन सिंह वर्मा या प्रदीप अहिरवार को मौका मिल सकता है।
भाजपा में भी कम नहीं दावेदार
भाजपा के पास दो सीटें हैं, जिन पर वर्तमान में डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन काबिज हैं। पार्टी के सामने चुनौती मौजूदा चेहरों को बरकरार रखने या नए क्षत्रपों को एडजस्ट करने की है। चर्चा में बड़े नाम के तौर पर पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, प्रखर वक्ता जयभान सिंह पवैया और लाल सिंह आर्य जैसे दिग्गजों के नामों पर मंथन जारी है। भाजपा में अंतिम निर्णय हमेशा चौंकाने वाला होता है, जिससे दावेदारों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।
