अब बिना लाइसेंस नहीं बेच पाएंगे दूध, मिलावटखोरी पर कड़ा प्रहार
डेयरी समितियों को छोड़कर सभी उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए पंजीयन अनिवार्य
भोपाल। प्रदेश में मिलावटखोरी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश में अब दूध के उत्पादन और विक्रय के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता लागू कर दी गई है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य जनता तक शुद्ध दूध पहुँचाना और दूध के नाम पर जहर परोसने वाले मिलावटखोरों पर नकेल कसना है।
सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को छोड़कर अन्य सभी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं को लाइसेंस लेना होगा। दूध के संग्रहण, परिवहन में उपयोग होने वाले उपकरण और भंडारण व्यवस्था की भी समय-समय पर सघन जांच की जाएगी। दूध से जुड़ी गतिविधियों की हर महीने प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाएगी, ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
देश के कुल उत्पादन में 9 फीसदी हिस्सेदारी
प्रदेश वर्तमान में देश के अग्रणी दुग्ध उत्पादक राज्यों में से एक है। आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में सालाना 213 लाख टन दूध का उत्पादन होता है। यह देश के कुल दूध उत्पादन का लगभग 9 प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्रों में दूध के संग्रह को मजबूती देने के लिए 381 नई सहकारी समितियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। प्रदेश का सबसे प्रमुख और विश्वसनीय डेयरी ब्रांड बना हुआ है।
20 फीसदी तक उत्पादन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डा मोहन यादव ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने के लिए दूध उत्पादन को वर्तमान के 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। सरकार का मानना है कि पंजीकरण की इस प्रक्रिया से असंगठित क्षेत्र के दूध विक्रेताओं की पहचान हो सकेगी और उन्हें मुख्यधारा से जोड़कर गुणवत्ता मानकों को बेहतर बनाया जा सकेगा।
कैसे बनेगा लाइसेंस
दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए जल्द ही एक विशेष पंजीकरण पोर्टल शुरू किया जाएगा। लाइसेंस बनवाने के लिए विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा,. अपने डेयरी या व्यवसाय से संबंधित आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे, मानकों के अनुरूप स्वच्छता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का शपथ पत्र देना होगा।
