मंत्रालय कर्मचारी हो रहे लामबंद, आंदोलन की कर रहे तैयारी
चौथा समयमान वेतनमान और कैशलेस बीमा जैसे 19 मुद्दों पर ठप हो सकता है कामकाज
भोपाल। मंत्रालय में आने वाले दिनों में कामकाज प्रभावित हो सकता है। अपनी लंबे समय से लंबित न्यायोचित मांगों को लेकर मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ ने अब आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। संघ की कार्यकारिणी की आपात बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बार-बार ज्ञापन और वार्ताओं के बाद भी अधिकारियों के अड़ियल रवैये के कारण अब प्रदर्शन ही एकमात्र रास्ता बचा है।
आंदोलन का मुख्य कारण वेतन विसंगति और पदोन्नति के रास्तों का बंद होना है। संघ के अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक ने बताया कि चौथा समयमान वेतनमान पूरे प्रदेश में लागू होने के बावजूद मंत्रालय के कर्मचारी इससे वंचित हैं। सामान्य प्रषासन विभाग ने 9 मार्च 2020 को आदेश दिए थे कि राज्य प्रशासनिक सेवा की तर्ज पर उच्च पदनाम दिया जाए। इसे पांच विभागों (शिक्षा, स्वास्थ्य, कोष एवं लेखा आदि) ने लागू कर दिया, लेकिन खुद सामान्य प्रषासन विभाग ने 5 साल बाद भी इसे अमलीजामा नहीं पहनाया।
कर्मचारियों की यह है मांगें
कर्मचारी संघ ने 19 सूत्रीय मांग पत्र तैयार किया है, जिनमें शासन पर बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय भार वाली इस योजना को अब तक लागू नहीं किया गया, स्थाई कर्मियों को सातवां वेतनमान न मिलना और आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन व अवकाश की सुविधा का अभाव,’ केंद्र की तर्ज पर फुल पेंशनेबल सर्विस की अवधि 33 वर्ष से घटाकर 25 वर्ष की जाए, मंत्रालय स्थापना के आकस्मिकता निधि कर्मचारियों की नियमितीकरण परीक्षा का रिजल्ट 3 वर्षों से अटका है।
एक मंच पर आएंगे सभी कर्मचारी संघ
इस आंदोलन को धार देने के लिए संघ अब अजाक्स और शीघ्र लेखक संघ से भी चर्चा कर रहा है। चूंकि चौथा समयमान वेतनमान विधानसभा और राजभवन के कर्मचारियों को भी नहीं मिला है, इसलिए उन्हें भी एक मंच पर लाने की अपील की गई है। यदि जल्द ही शासन स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो मंत्रालय में तालाबंदी जैसी स्थिति बन सकती है।
