अब विषय बदलकर अंडर ग्रेजुएट करने वालें विद्यार्थियों को देनी होगी परीक्षा
भोपाल। प्रदेश में अब विषय बदलकर अंडर ग्रेजुएट (यूजी) करने वाले विद्यार्थियों को पात्रता परीक्षा देनी होगी। यानी किसी विद्यार्थी ने 12वीं परीक्षा मैथ्य-साइंस विषय से की है तो उन्हें आर्ट्स या अन्य किसी विषय में यूजी करने के लिए पात्रता परीक्षा देगी होगी। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने एकीकृत परीक्षा कराने की तैयारी शुरू कर दी है
उच्च शिक्षा विभाग ने आयुक्त और सभी विश्वविद्यालयों को सर्कुलर जारी कर शैक्षणिक सत्र 2026-27 और 2027-28 के लिए परीक्षा कराने की जिम्मेदारी उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विवि को सौंपी है। इस एग्जाम में सफल विद्यार्थी प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध कॉलेज में प्रवेश ले सकेंगे। नई व्यवस्था के मुताबिक, यदि किसी विद्यार्थी ने 12वीं क्लास की परीक्षा मैथ्य या साइंस विषय से पास की है और वह यूजी में आर्ट्स- कॉमर्स या किसी अन्य संकाय से पढ़ाई करना चाहता है तो उसे संबंधित विषय की परीक्षा पास करनी होगी। यह निर्णय यूजीसी रेगुलेशन-2025 के तहत विवि समन्वय समिति की स्थायी समिति की अनुशंसा पर लिया गया है।
पीजी में यह व्यवस्था पहले सत्र से लागू
पीजी में यह व्यवस्था पिछले सत्र से ही भी लागू है, लेकिन विश्वविद्यालय स्तर पर कोई परीक्षा नहीं हो सकी। जानकारों का कहना है कि 25 प्रतिषत विद्यार्थी 12वीं के बाद विषय बदलते हैं। इसलिए यूजी में व्यवस्था लागू करने से पहले अध्यादेश संशोधन जरूरी है।
यूजी के अध्यादेश में अभी प्रावधान नहीं
मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत यूजी के लिए अध्यादेश 14 (1) और पीजी के लिए अध्यादेश 14 (2) लागू हैं। यूजी अध्यादेश 14 (1) में प्रवेश परीक्षा का कोई प्रावधान नहीं है, फिर भी विभाग यूजी के लिए पात्रता परीक्षा कराने जा रहा है। पीजी अध्यादेश 14(2) में व्यवस्था है कि विद्यार्थी अपने यूजी के मेजर-माइनर विषयों से अलग विषय में भी पीजी कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे संबंधित विषय की राष्ट्रीय (सीयूईटी) या विश्वविद्यालय स्तर की प्रवेश परीक्षा पास करना जरूरी होगा।
