एम्स डॉक्टर सुसाइड मामला, मानवाधिकार आयोग हुआ सख्त
पुलिस कमिश्नर और डायरेक्टर को नोटिस जारी
भोपाल। राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में डॉक्टर प्रताड़ना और उसके बाद हुई आत्महत्या के मामले में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इस संवेदनशील मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए भोपाल पुलिस कमिश्नर और एम्स के संचालक को नोटिस जारी कर तलब किया है।
प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव, एम्स भोपाल के डायरेक्टर और पुलिस कमिश्नर को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगले 15 दिनों के भीतर मामले की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। आयोग ने विशेष रूप से मामले में दर्ज की गई उस एफआईआर की कॉपी, डॉ. रश्मि वर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, संस्थान की पॉश कमेटी की पूरी जानकारी और अब तक की कार्यवाही आयोग ने मांगी है।
क्या है पूरा मामला?
भोपाल एम्स की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा ने 11 दिसंबर 2025 को ड्यूटी से लौटने के बाद एनेस्थीसिया का हाई डोज इंजेक्ट कर आत्महत्या का प्रयास किया था। लगभग तीन सप्ताह तक चले उपचार के बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, जहर के असर से उनका हृदय 7 मिनट तक बंद रहा, जिससे मस्तिष्क को ग्लोबल हाइपोक्सिया (ब्रेन डैमेज) जैसी गंभीर क्षति हुई थी।
प्रताड़ना के आरोप और अब तक की कार्यवाही
इस घटना के बाद एम्स परिसर में हड़कंप मच गया था। डॉ. रश्मि के परिजनों और सहकर्मियों ने ट्रॉमा एवं इमरजेंसी विभाग के एचओडी डॉ. यूनुस पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान ने एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया था और डॉ. यूनुस को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया गया था।
