प्रदेश के बारह लाख कर्मचारियों को महंगाई का झटका
डीए में तीन फीसदी की वृद्धि, लेकिन लक्ष्य से अब भी 6 फीसदी पीछे सरकार’’
भोपाल। प्रदेश के करीब 12 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते (डीए) की खबर खट्टी-मीठी साबित हो रही है। राज्य सरकार ने डीए में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन यह वृद्धि कर्मचारियों की उम्मीदों और सरकार के ही पुराने रोडमैप के मुकाबले काफी कम नजर आ रही है। इस फैसले के बाद प्रदेश में अब डीए की दर 59 फीसदी से बढ़कर 53 फीसदी (सातवें वेतनमान के तहत) हो जाएगी, जबकि विभागीय लक्ष्य के अनुसार इसे अब तक 66 फीसदी तक पहुंच जाना चाहिए था।
सरकार की घोषणा के अनुसार, बढ़ा हुआ 3 प्रतिशत डीए अप्रैल के वेतन में जुड़कर आएगा, जिसका नकद भुगतान मई 2026 से शुरू होगा। इस निर्णय से प्रदेश के 7.5 लाख नियमित कर्मचारियों और 4.5 लाख पेंशनर्स को राहत तो मिलेगी, लेकिन केंद्र और राज्य के बीच का अंतर कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
विभागीय रोडमैप बनाम जमीनी हकीकत
वित्त विभाग ने भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया था, जो वर्तमान में पिछड़ता नजर आ रहा है। वित्त विभाग ने 2025-26 में 64 फीसदी लक्ष्य तय किया था जबकि वर्तमान स्थिति में 58 फीसदी यानि 6 फीसदी पीछे रह जाएगा। वहीं 2026-27 में 74 फीसदी, 2027-28 में 84 फीसदी और 2028-29 में 94 फीसदी डीए देने का वित्त विभाग ने लक्ष्य तय किया था। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यदि सरकार अपने वादे के अनुरूप चलती, तो मार्च 2026 तक 64 फीसदी का आंकड़ा छुआ जा सकता था। अब मांग उठ रही है कि केंद्र द्वारा मार्च में संभावित बढ़ोतरी के साथ ही राज्य में भी तत्काल प्रभाव से लाभ दिया जाए।
छठवें और पांचवें वेतनमान का गणित
सिर्फ सातवां वेतनमान ही नहीं, बल्कि पुराने वेतनमान वाले कर्मचारियों के लिए भी वृद्धि का प्लान तैयार है। छठवें वेतनमान के तहत वर्तमान में 252 फीसदी से बढ़ाकर इसे 255 फीसदी किया जाएगा। आगामी वर्षों में इसे 295 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य है। जबकि पांचवां वेतनमान वर्तमान दर को 315 फीसदी से बढ़ाकर 345 फीसदी करने का प्रस्ताव है। आंकड़े बताते हैं कि राज्य सरकार केंद्र के फैसलों को लागू करने में काफी समय ले रही है। पिछली बार केंद्र की घोषणा के 8 महीने बाद राज्य कर्मचारियों को बढ़ा हुआ भत्ता मिला था। यदि केंद्र मार्च में पुनः डीए बढ़ाता है, तो राज्य के कर्मचारियों को उस लाभ के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
