लुप्तप्राय पक्षियों का सुरक्षित ठिकाना बनता प्रदेश
45 जिलों के 360 स्थलों पर दर्ज हुई पक्षियों की 308 प्रजातियां
भोपाल। मध्यप्रदेश का पारिस्थितिक तंत्र इन दिनों पक्षी प्रेमियों और वैज्ञानिकों के लिए चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वन विभाग और मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा हाल ही में जारी ’एशियन वॉटरबर्ड सेंसस-2026’ की रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि प्रदेश न केवल मानव बस्तियों का, बल्कि दुर्लभ और लुप्तप्राय पक्षियों का भी एक ’सुरक्षित ठिकाना’ बन चुका है।
’एशियन वॉटरबर्ड सेंसस-2026’ की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 3 से 8 जनवरी, 2026 के चलाए गए इस व्यापक सर्वेक्षण में रिकॉर्ड भागीदारी देखने को मिली। वन विभाग के मैदानी अमले के साथ स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों, पक्षी विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों ने मिलकर प्रदेश के 45 जिलों के 360 स्थलों पर अपनी नजरें जमाईं। सर्वेक्षण के दौरान कुल 412 चेकलिस्टों का गहन विश्लेषण किया गया, जिसके परिणाम उत्साहजनक रहे। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश मेंकुल दर्ज पक्षी प्रजातियां 308, कुल पक्षियों की संख्या 96,495 आंकी गई। इस रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू 24 दुर्लभ, संकटग्रस्त और लुप्तप्राय प्रजातियों की मौजूदगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रजातियों का यहां पाया जाना प्रदेश के जलाशयों और नमभूमि क्षेत्रों के स्वस्थ होने का प्रमाण है। सूचीबद्ध दुर्लभ प्रजातियों में प्रमुख रूप से इंडियन स्कीमर, सारस क्रेन, व्हाइट-रम्प्ड वल्चर, रेड-हेडेड वल्चर, पेंटिड स्टॉर्क और ब्लैक-हेडेड आइबिस शामिल हैं। इसके अलावा, विदेशी प्रवासी पक्षियों की निरंतर उपस्थिति ने भी प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय महत्व को रेखांकित किया है।
चंबल के जलस्रोत वाले इलाकां में 141 प्रजातियां
राज्य स्तरीय रिपोर्ट में वार्षिक चंबल पक्षी सर्वेक्षण (5-15 फरवरी) को भी शामिल कर इसकी व्यापकता बढ़ाई गई है। चंबल के बीहड़ और जलस्रोत वाले इलाकों में 141 प्रजातियों का दर्ज होना यह बताता है कि यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए एक महत्वपूर्ण कोरिडोर बना हुआ है। यह डेटा न केवल पक्षियों की गणना है, बल्कि यह भविष्य में उनके संरक्षण की रणनीति तैयार करने के लिए आधारभूत कड़ी साबित होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी प्रकार जलस्रोतों का संरक्षण जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में दुर्लभ प्रजातियों की संख्या में और वृद्धि दर्ज की जा सकती है।
