पेंशन के 10 हजार करोड़, आमने-सामने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़
भोपाल। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच राज्य विभाजन की विरासत से जुड़ी फाइलें आज भी सुर्खियां बटोर रही हैं। हाल ही में बजट सत्र के दौरान वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने सदन जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ सरकार ने पेंशन देनदारियों के नाम पर मध्य प्रदेश के सामने 10,133 करोड़ रुपये का बड़ा दावा पेश किया है। साल 2000 में हुए विभाजन के ढाई दशक बाद भी यह करोड़ों की देनदारी दोनों राज्यों के बीच प्रशासनिक खींचतान का नया केंद्र बन गई है।
यह पूरा मामला उन सरकारी कर्मचारियों की पेंशन से जुड़ा है, जिन्होंने विभाजन के समय छत्तीसगढ़ को अपना कार्यस्थल चुना था। आइए, मामले के प्रमुख बिंदुओं को समझते हैं। मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49 के तहत पेंशन देनदारियों का बंटवारा जनसंख्या के अनुपात में (48,566ः 17,615) तय किया गया था। छत्तीसगढ़ राज्य का आरोप है कि ऑडिट और पुनः सत्यापन के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि मध्य प्रदेश की ओर 10,133 करोड़ रुपये का भुगतान शेष है। छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 अगस्त 2025 को आधिकारिक रूप से यह दावा प्रस्तुत किया था।
वर्तमान स्थिति
वित्त मंत्री बनाया कि इस गंभीर आर्थिक मसले को सुलझाने और दावों की सत्यता जांचने के लिए 28 नवंबर 2025 को दोनों राज्यों के अधिकारियों का एक साझा कार्य समूह गठित किया गया है। यह समूह वर्तमान में इस दावे का बारीकी से अध्ययन कर रहा है, ताकि दशकों पुरानी इस वित्तीय गुत्थी को सुलझाया जा सके।
