चार साल में 715 बंदियों ने तोड़ा दम, 36 ने की खुदकुशी
प्रदेष की जेलों में है क्षमता से अधिक कैदी, 54 कैदी हुए फरार
भोपाल। प्रदेश की जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों के बोझ और उनकी सुरक्षा को लेकर विधानसभा में अहम जानकारी सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधायक उमाकांत शर्मा के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में स्वीकार किया कि प्रदेश की जेलों में क्षमता से अधिक बंदी रखे गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 1 अप्रैल 2020 से अब तक जेलों में 715 बंदियों की मृत्यु और 36 द्वारा आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए हैं।
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं। इस अवधि में कुल 54 बंदी जेल से फरार होने में सफल रहे। इसके अतिरिक्त, जेल परिसर के भीतर आपसी हिंसा और अन्य गंभीर घटनाओं के भी 21 प्रकरण सामने आए हैं। हालांकि, सरकार का दावा है कि ’मध्यप्रदेश जेल नियमावली 1968’ के तहत सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। सरकार द्वारा दी जानकारी के अनुसार जेलों को हाई-टेक बनाने की दिशा में सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें 15 जेलों की बाउंड्रीवॉल पर इलेक्ट्रिक वायर फेंसिंग लगाई जा चुकी है, शेष जेलों में कार्य प्रक्रियाधीन है। सभी जेलों को सीसीटीवी नेटवर्क से जोड़ दिया गया है। समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट कराकर कमियों को दूर किया जा रहा है। जेल सुरक्षा में रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में 11 केंद्रीय, 41 जिला, 73 उप जेल एवं 8 खुली जेलें संचालित हैं, जिनमें सुधार और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बरकरार है।
2828 बंदियों को उद्योगों का प्रशिक्षण
बंदियों को मुख्यधारा से जोड़ने के सकारात्मक प्रयास भी दिखाई दिए हैं। प्रदेश की 13 सर्किल और 11 जिला जेलों में उद्योग संचालित हैं। वर्ष 2025 में 2828 बंदियों को विभिन्न उद्योगों में प्रशिक्षण दिया गया। 3 जेलों में संचालित आईटीआई के माध्यम से 96 बंदियों ने तकनीकी शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 2025 में 1007 बंदी विभिन्न कक्षाओं की परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 6646 बंदियों को साक्षर बनाया गया। 550 बंदियों ने हिंदी राष्ट्रभाषा की परीक्षा भी दी।
