कूनो में चीतों के खान-पान पर खर्च किए सवा करोड़
जंगल से बाहर ग्रामीणों के पशुओं को भी बना रहे निशाना
भोपाल। प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए मेहमानों यानी चीतों के खान-पान और प्रबंधन पर सरकार भारी-भरकम राशि खर्च कर रही है। विधानसभा में पेश किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में इन चीतों को बकरे का मीट खिलाने पर 1.27 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई है।
यह जानकारी कांग्रेस विधायक मुकेश महरौत्रा द्वारा पूछे गए एक लिखित प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री डा मोहन यादव द्वारा दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि चीतों के भोजन के लिए अलग से कोई विशेष बजट आवंटित नहीं किया जाता है। इसके बजाय, वन्यजीव प्रबंधन और चिकित्सकीय देखभाल के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत उपलब्ध फंड से मीट की खरीदी की जाती है। वित्तीय वर्श 2024-25 में इन पर 1,27,10,870 रुपये खर्च किया गया है। जवाब में चीतों की खुराक को लेकर बताया है कि एक दिन में कितने बकरे खिलाए जाएंगे, इसका कोई मानक तय नहीं है। चीतों की शारीरिक आवश्यकता और परिस्थितियों के अनुसार उन्हें मीट उपलब्ध कराया जाता है।
जंगल के बाहर भी शिकार का शौक
वर्तमान में कूनो वन्यजीव वनमंडल में कुल 32 चीते (शावकों सहित) मौजूद हैं। हालांकि, प्रशासन के लिए चुनौती तब खड़ी हो जाती है जब ये चीते खुले जंगल में विचरण करते हुए वनमंडल की सीमा पार कर जाते हैं। लिखित उत्तर में यह स्वीकार किया गया है कि सीमा से बाहर जाने पर चीते कभी-कभी ग्रामीणों की बकरियों और मवेशियों का शिकार कर लेते हैं। हालांकि, सरकार ने उन दावों को खारिज कर दिया कि चीता निगरानी टीम सतर्क नहीं है।
सुरक्षा और निगरानी पर सरकार का पक्ष
विधायक के प्रश्न के उत्तर में सरकार ने कहा कि चीता निगरानी और ट्रैकिंग टीम पूरी तरह से प्रभावी ढंग से काम कर रही है। हालांकि, तमाम सुरक्षा इंतजामों के बावजूद एक दुखद पहलू यह भी रहा कि हाल ही में राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुई एक सड़क दुर्घटना में एक चीते की मृत्यु हो गई है।
