13 महीनों में 184 मामले दर्ज, सज़ा सिर्फ एक को
बालाघाट में सबसे ज्यादा शिकार, छिंदवाड़ा में एक अपराधी को मिली सजा
भोपाल। डिजिटल इंडिया के दौर में जहां लेन-देन और संवाद उंगलियों पर सिमट गया है, वहीं साइबर अपराधी भी इसी रफ़्तार से अपनी जड़ें जमा रहे हैं। प्रदेश के महाकौशल और आसपास के जिलों से आए पिछले एक साल के आँकड़े न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि हमारी जांच एजेंसियों और कानूनी प्रक्रिया की कछुआ चाल पर भी सवालिया निशान खड़े करते हैं।
1 जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच दर्जनों जिलों में सैकड़ों साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए, लेकिन न्याय की मंज़िल तक पहुँचने में पुलिस और प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इन तमाम जिलों में से केवल छिंदवाड़ा ही वह इकलौता जिला रहा, जहां एक अपराधी को उसके किए की सज़ा दिलाई जा सकी। पिछले 13 माह में दर्ज आंकड़ों के अनुसार जबलपुर में 36, कटनी में 15, छिंदवाड़ा में 17, बालाघाट में 58, मंडला में 7, सिवनी में 26, पांढुर्णा में 4 और बैतूल में 21 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए। इनमें से मात्र छिंदवाड़ा जिले में एक मामले में अपराधी को सजा दिलाई गई। बाकी मामलों में अब तक किसी को भी सजा नहीं दिलाई जा सकी।
छिंदवाड़ा में एक को मिली सजा
आँकड़े बताते हैं कि बालाघाट जिले में 58 मामले’ और’जबलपुर जिले में 36 मामले दर्ज हुए हैं जो यह दर्शाता है कि इन जिलों में साइबर क्राइम का ग्राफ सबसे ऊँचा है, लेकिन यहां सज़ा का प्रतिशत अभी भी शून्य है। केवल छिंदवाड़ा में एक मामले में अपराधी को सज़ा मिलना यह दर्शाता है कि साइबर अपराधों में साक्ष्य जुटाना और उन्हें कोर्ट में साबित करना कितना पेचीदा काम है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधी अक्सर दूसरे राज्यों या सीमाओं के बाहर से काम करते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना और कानूनी प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है, लेकिन सज़ा की यह बेहद कम दर अपराधियों के हौसले बुलंद करने के लिए काफी है।
