पेंच टाइगर रिजर्व ईको सेंसिटिव जोन की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर महाकौशल क्षेत्र के पेंच टाइगर रिजर्व में लागू किए जा रहे ईको सेंसिटिव जोन के मास्टर प्लान पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने सिवनी और छिंदवाड़ा जिले के 108 आदिवासी बाहुल्य गांवों में व्याप्त डर और आशंकाओं की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया है।
सिंह ने अपने पत्र में प्रक्रियागत खामियों को लेकर कहा कि 285 पृष्ठों के विस्तृत मास्टर प्लान को ग्राम सभाओं में प्रस्तुत नहीं किया गया। ग्रामीणों को केवल 4 पृष्ठों की संक्षिप्त जानकारी दी गई। संपूर्ण दस्तावेज अंग्रेजी भाषा में है, जिससे स्थानीय आदिवासी ग्रामीण इसके प्रावधानों और अपने अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने में असमर्थ हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम सभाएं मात्र 24 घंटे की पूर्व सूचना पर आयोजित की गईं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन है। सिंह ने कहा कि सिवनी और छिंदवाड़ा के प्रभावित क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा एक्ट के दायरे में आते हैं। नियमों के अनुसार, जल, जंगल और जमीन से जुड़े किसी भी बड़े निर्णय में ग्राम सभाओं की सक्रिय सहभागिता और सहमति अनिवार्य है। कुरई जनपद के 55 ग्राम सीधे तौर पर इससे प्रभावित हो रहे हैं, जिन्हें अंधेरे में रखा जा रहा है।
जनप्रतिधियों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
उन्होंने पत्र में लिखा कि केवलारी विधायक रजनीश सिंह, कांग्रेस जिला अध्यक्ष नरेश मरावी और सरपंच संघ (कुरई) सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है जिसमें मास्टर प्लान का हिंदी अनुवाद सार्वजनिक किया जाए, संपूर्ण 285 पृष्ठों की प्रति हर ग्राम सभा को उपलब्ध कराई जाए, आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने के लिए कम से कम 30 दिनों का समय दिया जाए, पूरी प्रक्रिया को पंचायत राज अधिनियम और पेसा एक्ट के अनुरूप पारदर्शी बनाया जाए।
