प्रति व्यक्ति आय बढ़ी , जीएसडीपी में 11.14 फीसदी की वृद्धि
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने विधानसभा में पेश किए आंकड़े
भोपाल। मध्यप्रदेश ने अपनी दूरदर्शी आर्थिक नीतियों के जरिए समावेशी विकास का एक नया मॉडल पेश किया है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने मंगलवार को विधानसभा में वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया। सर्वेक्षण के आँकड़े बताते हैं कि राज्य की अर्थव्यवस्था न केवल बढ़ रही है, बल्कि वित्तीय अनुशासन के साथ सुदृढ़ भी हो रही है।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमानों के अनुसार राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) प्रचलित भावों पर 16,69,750 करोड़ रुपये आँका गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 11.14 प्रतिषत की बढ़त है। वहीं, स्थिर भावों पर वास्तविक वृद्धि दर 8.04 प्रतिषत रही है। सर्वेक्षण का आम जनता की आय में वृद्धि पाई गई है। वर्ष 2011-12 में जो प्रति व्यक्ति आय मात्र 38,497 थी, वह अब बढ़कर 1,69,050 हो गई है। देवड़ा ने कहा कि यह लोगों के जीवन स्तर में आए गुणात्मक सुधार का सीधा प्रमाण है। प्राथमिक क्षेत्र (कृषि) में 7.31 प्रतिषत की वृद्धि दर्ज की गई। खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिषत की बढ़ोतरी हुई है। गाँवों में 40.82 लाख आवासों का निर्माण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है। निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र 9.93 प्रतिषत की दर से बढ़ा है। राज्य में 1.17 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों से 1.7 लाख रोजगार’ के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इसी तरह सेवा क्षेत्र ने सबसे तेज 15.80 प्रतिषत की वृद्धि दिखाई है। पर्यटन में साल भर में 13.18 करोड़ पर्यटक पहुंचे हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
कुल जीएसडीपी का 3 प्रतिषत स्वास्थ्य पर खर्च किया जा रहा है। मातृ मृत्यु दर में भारी कमी आई है (379 से घटकर 142)। अब तक 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। वहीं बजट का 10.37 हिस्सा शिक्षा को समर्पित है। प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट रेट अब शून्य हो चुका है।
