बेरोजगार अब आकांक्षी युवा, पर काम का इंतज़ार बरकरार
2023 में रिकॉर्ड 13.71 लाख पंजीयन, पर जॉइनिंग का डेटा सरकार के पास नहीं
भोपाल। प्रदेश सरकार ने भले ही सरकारी फाइलों में बेरोजगार शब्द को बदलकर आकांक्षी युवा कर दिया हो, लेकिन धरातल पर युवाओं की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा है। विधानसभा में विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री गौतम टेटवाल ने जो आंकड़े पेश किए, वे प्रदेश में रोजगार की स्थिति पर कई सवाल खड़े करते हैं।
टेटवाल द्वारा दिए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 से 2025 के बीच युवाओं के रुझान में बड़ा उतार-चढ़ाव देखा गया। वर्ष 2023 में सबसे ज्यादा 13,71,134 युवाओं ने रोजगार कार्यालयों में पंजीयन कराया। वर्ष 2024 में यह संख्या गिरकर मात्र 1,75,369 रह गई। दिसंबर 2025 की स्थिति में प्रदेश में ’’25.96 लाख आकांक्षी युवा पंजीकृत हैं, जो कि दिसंबर 2018 की तुलना में 86 हजार कम है।
नवीनीकरण न होने से घटी संख्या
पंजीकृत युवाओं की संख्या में कमी आने के पीछे मंत्री ने एक तकनीकी कारण बताया। उनके अनुसार, जून 2025 तक संख्या घटकर 25.68 लाख होने की मुख्य वजह यह है कि जो युवा प्रत्येक 3 वर्ष की अवधि में अपने पंजीयन का नवीनीकरण नहीं कराते, उनका नाम स्वतः ही सूची से निरस्त हो जाता है।
वर्गवार और शैक्षणिक स्थिति
विधायक ग्रेवाल ने बताया कि अनुसूचित जाति वर्ग में पंजीकृत युवाओं की संख्या 1.84 लाख से बढ़कर 4.71 लाख हो गई है। इनमें महिलाओं की संख्या में भी भारी उछाल आया है (75 हजार से बढ़कर 2.1 लाख)। पिछड़ा वर्ग की संख्या 13.28 लाख से घटकर 10.55 लाख रह गई है। वहीं सामान्य वर्ग में भी गिरावट दर्ज की गई है, इस वर्ग की संख्या 4.53 लाख से घटकर 2.94 लाख हो गई है। कक्षा 10वीं उत्तीर्ण युवाओं का पंजीयन 8.07 लाख से घटकर 3.17 लाख रह गया है, जबकि स्नातकोत्तरयुवाओं की संख्या बढ़कर 2.29 लाख हो गई है।
ऑफर लेटर तो मिले, पर नौकरी मिली या नहीं, जानकारी नहीं
रोजगार मेलों और निजी कंपनियों की सक्रियता पर मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 में 10 बड़ी कंपनियों ने 53,921 ऑफर लेटर जारी किए। भारतीय जीवन बीमा निगम (12,984 ऑफर), एल एंड टी (6,230) और एसबीआई लाइफ (4,402) द्वारा लेटर जारी किए गए। युवाओं को पांच हजार से 28 हजार रुपये के बीच औसत वेतन के ऑफर दिए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सरकार के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि ऑफर लेटर पाने वाले कितने युवाओं ने वास्तव में नौकरी जॉइन की।
