सोलर पंप योजना के नाम पर किसानों को कर्ज के जाल में फंसा रही सरकार
कांग्रेस का आरोप, 90 फीसदी सब्सिडी का दावा निकला खोखला
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने राज्य सरकार की सोलर पंप योजना पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। आज आयोजित एक पत्रकार वार्ता में नायक ने दस्तावेजी प्रमाणों के साथ दावा किया कि सरकार किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी का झांसा देकर उन्हें भारी भरकम बैंक ऋण के बोझ तले धकेल रही है।
नायक ने आधिकारिक ऋण स्वीकृति पत्रों का हवाला देते हुए योजना के गणित को साझा किया। उन्होंने कहा कि कुल परियोजना लागत लगभग 4,04,475 रूपए है। वास्तविक सब्सिडी मात्र 1,09,537 (जो दावों से काफी कम है) किसान की मार्जिन मनी 41,537 रूपए और बैंक ऋण का बोझ 2,53,402 प्रति किसान है। वहीं ईएमआई की मार 84 महीनों तक 3,987 प्रतिमाह (8.30 प्रतिश ब्याज दर पर) पड़ रही है। नायक ने सवाल उठाया कि जब सार्वजनिक रूप से 90 प्रतिशत सब्सिडी का वादा किया गया था, तो फिर किसानों के नाम पर ढाई लाख रुपये से अधिक का ऋण क्यों चढ़ाया गया? उन्होंने कहा यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें कर्जदार बनाने का माध्यम बन गई है। एक तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में 10 घंटे बिजली नहीं मिल रही, वहीं दूसरी तरफ सोलर के नाम पर किसानों की मेहनत पर राजनीति की जा रही है।
सरकार से पूछे सवाल
नायक ने सरकार से जानना चाहा कि 90 फीसदी सब्सिडी की घोषणा किस आधार पर की गई और वास्तविक प्रतिशत को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया, क्या किसानों को बताया गया था कि 10 प्रतिशत अंशपूंजी जमा करने के बाद भी उन पर बैंक लोन रहेगा, क्या सोलर कंपनियों को भुगतान के पीछे किसी तरह की कमीशनखोरी या बिचौलियों की भूमिका है, क्या सरकार इस ऋण का पुनर्मूल्यांकन कर शेष राशि खुद वहन करेगी। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र न्यायिक जांच कब कराई जाएगी?
भाजपा कार्यालय में जाकर बैठें शास्त्री
नायक ने धीरेन्द्र शास्त्री के माला और भाला रखने वाले बयान को लेकर कहा कि ऐसे बयान सामाजिक समरसता और शांति के खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शास्त्री लगातार विभाजनकारी भाषा का उपयोग कर रहे हैं और प्रशासन को इस पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। नायक ने तंज कसते हुए कहा कि शास्त्री को भाजपा कार्यालय में जाकर बैठना चाहिए, क्योंकि उनके बयान किसी धार्मिक संत से अधिक एक राजनीतिक कार्यकर्ता जैसे प्रतीत होते हैं। जहां शास्त्री के समर्थक उनके बयान को धार्मिक चेतना का आह्वान बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसे सामाजिक सद्भाव के खिलाफ बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही है। फिलहाल, यह मामला प्रदेश की राजनीति में तूल पकड़ता जा रहा है।
