एयर इंडिया के लंदन-बेंगलुरु बोइंग 787 में फ्यूल स्विच खराब, विमान उड़ान के बाद ग्राउंड सुरक्षा पर सवाल
नई दिल्ली. एयर इंडिया के लंदन से बेंगलुरु जा रहे बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान में इंजन फ्यूल कंट्रोल स्विच से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ी सामने आने के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. यह खराबी उड़ान पूरी होने के बाद रिपोर्ट की गई, जिसके तुरंत बाद एयर इंडिया ने संबंधित विमान को एहतियातन ग्राउंड कर दिया और जांच शुरू कर दी है. यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इसी तरह की गड़बड़ी जून 2025 में हुए एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 हादसे की जांच के केंद्र में रही थी.
जानकारी के अनुसार, बोइंग 787-8 विमान (रजिस्ट्रेशन VT-ANX) ने लंदन से बेंगलुरु तक की उड़ान पूरी की थी. विमान के बेंगलुरु में लैंड करने के बाद पायलट ने तकनीकी रिपोर्ट में बाएं इंजन के फ्यूल कंट्रोल स्विच के असामान्य व्यवहार की जानकारी दी. रिपोर्ट के मुताबिक, इंजन स्टार्ट के दौरान फ्यूल कंट्रोल स्विच ‘RUN’ स्थिति में ठीक से लॉक नहीं रह पा रहा था और दो प्रयासों में वह ‘CUTOFF’ की ओर खिसकता हुआ पाया गया. यह स्थिति सामान्य संचालन के लिहाज से सुरक्षित नहीं मानी जाती.
फ्यूल कंट्रोल स्विच विमान के इंजन तक ईंधन की आपूर्ति को नियंत्रित करता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह स्विच उड़ान के दौरान अनजाने में ‘CUTOFF’ स्थिति में चला जाए, तो इंजन बंद हो सकता है, जिससे गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है. हालांकि इस उड़ान के दौरान कोई आपात स्थिति सामने नहीं आई और विमान सुरक्षित रूप से बेंगलुरु पहुंच गया, लेकिन उड़ान के बाद इस तकनीकी खामी का सामने आना कई सवाल छोड़ गया है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर इंजन स्टार्ट के समय इस तरह की तकनीकी गड़बड़ी देखी गई थी, तो विमान को उड़ान की अनुमति कैसे दी गई. विमानन सूत्रों का कहना है कि आमतौर पर ऐसी स्थिति में विमान को तकनीकी जांच के बाद ही उड़ान भरने की मंजूरी दी जाती है या फिर उड़ान रद्द कर दी जाती है. इस मामले में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि तकनीकी समस्या कब और किस स्तर पर नोट की गई और उड़ान से पहले क्या कदम उठाए गए थे.
एयर इंडिया ने इस मामले में बयान जारी करते हुए कहा है कि पायलट द्वारा फ्यूल कंट्रोल स्विच में संभावित खराबी की रिपोर्ट मिलने के बाद विमान को तुरंत ग्राउंड कर दिया गया है. एयरलाइन ने विमान निर्माता बोइंग और संबंधित उपकरण निर्माता हनीवेल को जांच के लिए शामिल किया है. साथ ही, इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को भी दे दी गई है. एयर इंडिया का कहना है कि जांच पूरी होने और समस्या के समाधान तक विमान को सेवा में वापस नहीं लाया जाएगा.
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब बोइंग 787 विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच पहले से ही जांच के दायरे में हैं. 12 जून 2025 को अहमदाबाद के पास एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया था कि टेक-ऑफ के तुरंत बाद दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच लगभग एक साथ ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ स्थिति में चले गए थे, जिससे इंजन में ईंधन की आपूर्ति रुक गई और विमान हादसे का शिकार हो गया. उस दुर्घटना में 260 लोगों की जान चली गई थी.
AAIB की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता हुआ सुना गया था कि उसने फ्यूल क्यों बंद किया, जबकि दूसरे पायलट ने इससे इनकार किया. रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि स्विच किसी पायलट द्वारा बदले गए थे या यह किसी तकनीकी या यांत्रिक खराबी का नतीजा था. इस कारण से फ्यूल कंट्रोल स्विच की डिजाइन, लॉकिंग मैकेनिज्म और सिस्टम लॉजिक को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं.
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में अमेरिका की फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने बोइंग विमानों में फ्यूल कंट्रोल स्विच के लॉकिंग सिस्टम में संभावित समस्या को लेकर एक सूचना बुलेटिन जारी किया था. हालांकि यह निर्देश अनिवार्य नहीं था, इसलिए कई एयरलाइनों ने उस समय व्यापक जांच नहीं कराई थी. अहमदाबाद हादसे के बाद भारत के विमानन नियामक DGCA ने देश में संचालित अधिकांश बोइंग विमानों में इन स्विचों की जांच के आदेश दिए थे. एयर इंडिया ने भी उस दौरान अपने बेड़े की जांच कर किसी समस्या से इनकार किया था.
ताजा मामले में विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही इस उड़ान में कोई हादसा नहीं हुआ, लेकिन उड़ान के बाद सामने आई तकनीकी रिपोर्ट को हल्के में नहीं लिया जा सकता. विशेषज्ञों के मुताबिक, जब एक ही प्रकार के विमान में बार-बार एक ही अहम सिस्टम से जुड़ी शिकायतें सामने आती हैं, तो पूरे बेड़े के स्तर पर गहन तकनीकी ऑडिट की जरूरत होती है.
फिलहाल DGCA इस घटना से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है. वहीं, एयर इंडिया और संबंधित तकनीकी एजेंसियां फ्यूल कंट्रोल स्विच के व्यवहार, उसके लॉकिंग मैकेनिज्म और सिस्टम रिकॉर्ड्स की जांच कर रही हैं. जांच के नतीजों पर ही यह तय होगा कि यह मामला किसी एक विमान तक सीमित है या इससे बड़े स्तर पर सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पड़ेगी.
