कांग्रेस नेताओं की लड़ाई पहुंची दिल्ली, भाजपा बोली नेतृत्व फेल, संगठन खोखला
संगठन में खींचतान और गुटबाजी ने कांग्रेस की बढ़ा दी मुश्किलें
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी कलह एक बार फिर सड़कों से निकलकर दिल्ली के गलियारों तक जा पहुंची है। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को पार्टी के भीतर व्याप्त घोर अनुशासनहीनता की शिकायत लेकर आलाकमान की शरण में जाना पड़ा है। इस घटनाक्रम ने न केवल संगठन की कमजोरी को उजागर किया है, बल्कि प्रदेश अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।
कांग्रेस की इस गुटबाजी पर सत्ताधारी दल भाजपा ने चौतरफा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस को आईना दिखाते हुए इसे कलह का आतंरिक संग्रहालय करार दिया। अग्रवाल ने लिखा कि जिस पार्टी के बड़े नेताओं को अपनों की ही शिकायत करने दिल्ली दौड़ना पड़े, वहां नेतृत्व की विफलता स्पष्ट है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में न तो कोई दिशा बची है और न ही जवाबदेही, वहां सिर्फ अराजकता का बोलबाला है। वैसे देखा जाए तो संगठन सृजन में जुटी कांग्रेस ने प्रदेश में जब जब संगठन विस्तार को लेकर कोई फैसला लिया तब-तब प्रदेश अध्यक्ष के फैसलों पर वरिष्ठ नेताओं की असहमति नजर आई है। इसके अलावा संगठन के भीतर एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ भी नेताओं में समय-समय पर दिखाई देती रही है, जिसे लेकर कई बार पार्टी नेताओं द्वारा ही सवाल खड़े किए गए हैं। इस बार भी दिल्ली में हुई बैठक में यही मुद्दा उठा है।
अनुशासन समिति के अध्यक्ष उठा चुके हैं सवाल
पार्टी के भीतर का असंतोष उस वक्त खुलकर सामने आ गया जब खुद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और अनुशासन समिति के सदस्यों ने नेतृत्व की क्षमता पर सवाल उठाए। अनुशासन समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह के बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि अनुशासनहीनता पर कार्रवाई के अधिकार सीमित हैं और जब तक बड़े नेता शिकायत नहीं करेंगे, समिति कार्रवाई नहीं कर पाएगी।
हाईकमान का निर्देश, जनता के बीच जाएं नेता
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में हुई हाई-प्रोफाइल बैठक में आलाकमान ने प्रदेश के नेताओं को जमकर फटकार लगाई है। पार्टी नेतृत्व ने दो टूक शब्दों में कहा है कि आपसी गुटबाजी छोड़कर गरीबों और युवाओं के मुद्दों पर सरकार को घेरें। हालांकि, जिस तरह से पार्टी दो फाड़ नजर आ रही है, उसे देखते हुए इन निर्देशों का धरातल पर क्रियान्वयन मुश्किल लग रहा है।
