भोपाल, इंदौर और ग्वालियर की लैब को मिला नेशनल सर्टिफिकेशन
टीबी के खिलाफ जंग में प्रदेश को मिली की बड़ी उपलब्धि
भोपाल। मध्य प्रदेश में क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन के अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। प्रदेश की तीन प्रमुख प्रयोगशालाओं को टीबी की नई दवाओं की जांच के लिए राष्ट्रीय प्रमाणन प्राप्त हुआ है। अब राज्य में ही दवा-प्रतिरोधी टीबी के मरीजों की सटीक जांच हो सकेगी, जिससे उपचार की राह और आसान होगी।
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि यह हमारे स्वास्थ्य तंत्र की वैज्ञानिक दक्षता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत आईआरएल भोपाल, एमआरटीबी इंदौर और जीआरएमसी ग्वालियर को नई दवाओं बेडाक्विलिन और प्रेटोमैनिड की जांच के लिए लिक्विड कल्चर ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग का अधिकार मिल गया है। प्रदेश की ये प्रयोगशालाएं देश के उन चुनिंदा 15 केंद्रों में शामिल हो गई हैं, जहाँ यह जटिल परीक्षण संभव है। यह प्रमाणीकरण सुप्रा नेशनल रेफरेंस लेबोरेटरी चेन्नई और केंद्रीय क्षय प्रभाग द्वारा प्रदान किया गया है।
मरीजों को मिलेगी राहत, अब चेन्नई पर निर्भरता खत्म
उल्लेखनीय है कि यह परीक्षण केवल बायो सेफ्टी लेवल-3 प्रयोगशालाओं में ही किया जा सकता है। इससे पहले पूरे देश में केवल एनआईआरटी चेन्नई ही इस जांच के लिए प्रमाणित था। देश भर से सैंपल चेन्नई भेजे जाने के कारण रिपोर्ट आने में देरी होती थी और व्यावहारिक कठिनाइयाँ आती थीं।
रिपोर्ट मिलने में देरी नहीं होगी
माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस पर दवाओं की प्रभावशीलता की जांच अब स्थानीय स्तर पर होगी, रिपोर्ट जल्द मिलने से मरीजों का इलाज तुरंत शुरू हो सकेगा। साथ ही टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य में मध्य प्रदेश अब और अधिक सशक्त भूमिका निभाएगा।
