हाईकोर्ट के फैसले को लागू करने, एरियर व इंक्रीमेंट देने की मांग
कर्मचारियों ने दी 13 को मंत्रालय घेराव की चेतावनी
भोपाल। हाईकोर्ट ने 2019 में नव नियुक्त कर्मचारियों के वेतन में तीन साल तक की गई कटौती को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया है और कटी हुई राशि लौटाने के निर्देश दिए हैं। फैसले से कर्मचारियों में उत्साह है। कर्मचारी मंच ने सरकार से सभी कर्मचारियों पर आदेश लागू करने, एरियर व इंक्रीमेंट जारी करने की मांग की है। मंच ने 13 जनवरी को भोपाल में मंत्रालय का घेराव कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर के एक अहम फैसले ने प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने वर्ष 2019 में जारी उस सरकारी आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत नव नियुक्त कर्मचारियों के वेतन में पहले तीन वर्षों तक क्रमशः 30, 20 और 10 प्रतिशत की कटौती की जा रही थी। इस निर्णय को कर्मचारी संगठनों ने कर्मचारियों के अधिकारों की निर्णायक जीत करार दिया है। मध्यप्रदेश कर्मचारी मंच के प्रांताध्यक्ष अशोक पांडेय ने भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि प्रदेश में अलग-अलग समय की सरकारों ने कर्मचारियों के हितों की लगातार अनदेखी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2000 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के फैसले से 28 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नौकरी गंवानी पड़ी थी, जबकि वर्ष 2019 में कमलनाथ सरकार ने नियमित कर्मचारियों के वेतन में जबरन कटौती का आदेश जारी किया।
पांडेय ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग ने 12 दिसंबर 2019 को आदेश जारी कर नियुक्ति के पहले वर्ष में 70 प्रतिशत, दूसरे वर्ष में 80 प्रतिशत और तीसरे वर्ष में 90 प्रतिशत वेतन देने का प्रावधान किया था। इस निर्णय के चलते हजारों कर्मचारियों को बीते छह वर्षों में करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन सरकार ने उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि कर्मचारी पूरी क्षमता से प्रदेश के विकास में योगदान दे सकें। पांडेय ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र ही स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए, तो 13 जनवरी को भोपाल में मंत्रालय का घेराव कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
मुफ्त योजनाओं पर सवाल, एरियर जारी करने की मांग
अशोक पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार लाड़ली बहना सहित अन्य योजनाओं के तहत मुफ्त में धन बांट रही है, जबकि कर्मचारियों के हक का पैसा वर्षों से रोका जा रहा है। उन्होंने मांग की कि कर्मचारियों का बकाया एरियर, जो करीब 20 वर्षों से लंबित है, तत्काल जारी किया जाए। साथ ही हाईकोर्ट के आदेश को केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित न रखते हुए प्रदेश के सभी कर्मचारियों पर लागू किया जाए।
