अपनों से ही घिरते जा रहे बुंदेलखंड में भाजपा के मंत्री
पार्टी में बढ़ रहा अंदरूनी घमासान, विधायक ने की प्रभारी मंत्री से शिकायत
भोपाल। मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड अंचल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मंत्रियों के लिए इन दिनों अपनों की नाराजगी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। सत्ता में होने के बावजूद, मंत्रियों को अपने ही दल के पुराने और वरिष्ठ नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिससे क्षेत्र की राजनीति गरमा गई है और पार्टी में अंदरूनी घमासान बढ़ता दिख रहा है।
बुंदेलखंड, जो भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, वहां पार्टी के दिग्गजों की यह आपसी खींचतान न केवल अनुशासन पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि आगामी चुनावों को देखते हुए भी भाजपा के लिए चिंता का विषय बन गई है। हाल ही में दमोह जिले से भाजपा में कलह की खबर सामने आ रही है। दरअसल यहां पर प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार से भाजपा विधायक उमा देवी खटीक ने क्षेत्र के दो मंत्रियों लखन सिंह पटेल और धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी की शिकायत की इसके बाद संगठन में हड़कंप मच गया। बताया जाता है कि उमा देवी लंबे समय से मंत्रियों को लेकर संगठन पदाधिकारियों से भी शिकायतें कर चुकी हैं, मगर अब तक मंत्रियों की कार्यशैली में सुधार नजर नहीं आया। यही वजह है कि विधायक ने प्रभारी मंत्री परमार से इस मंत्रियों की शिकायत की है। विधायक का कहना है कि दोनों ही मंत्री उनके विधानसभा में ज्यादा दखल देते हैं, वहीं क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं। इस पर प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार ने उन्हें शांत कराया और समस्या के हल होने का भरोसा दिया। मंत्री परमार ने कहा कि भाजपा का बड़ा परिवार है, सभी साथ मिलकर रहते।
सागर में लंबे समय से जारी है टकराव
बुंदेलखं डमें सबसे बड़ी खींचतान सागर जिले में देखने को मिली है, जहां कांग्रेस से भाजपा में आए मंत्री गोविंद सिंह राजपूत का विरोध पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह खुलकर कर रहे हैं। भूपेंद्र सिंह ने सार्वजनिक मंचों से यह दर्द जाहिर किया है कि कांग्रेस से आए नेताओं के कारण पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को उपेक्षित किया जा रहा है और उनकी पूछ-परख कम हो गई है। उनका आरोप है कि जिले में असंतुलन की स्थिति है, जिससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। हालांकि बीते दिनों प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सागर प्रवास के दौरान दोनों ही नेताओं मंत्री गोविंद सिंह और पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह को एक साथ बैठाकर सुलह कराने का प्रयास जरूर किया,इसके बाद मामला फिलहाल तो बयानबाजी से दूर है, मगर अंदरूनी तौर दोनों ही नेताओं के समर्थकों के बीच मनमुटाव दूर होता नजर नहीं आ रहा है।
