सिहोरा को जिला बनाने की मांग ने पकड़ी रफ्तार, महिलाओं ने बस स्टैंड पर शुरू की भूख हड़ताल
जबलपुर. सिहोरा को स्वतंत्र जिला बनाने की बहुप्रतीक्षित मांग ने एक नया और निर्णायक मोड़ ले लिया है. सिहोरा जिला आंदोलन का दूसरा दिन पूरी तरह से जनउभार, आक्रोश और दृढ़ संकल्प से भरा रहा, जिसने स्थानीय प्रशासन से लेकर प्रदेश सरकार तक का ध्यान आकर्षित किया है. शाम के समय निकाली गई सिहोरा स्वाभिमान वाहन रैली में सिहोरा वासियों का जो अदम्य आक्रोश और उत्साह दिखाई दिया, वह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि यह मांग अब केवल राजनीतिक घोषणाओं तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है.
इस आंदोलन में सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहलू यह रहा कि एक दर्जन स्थानीय महिलाएँ सुबह से ही पुराने बस स्टैंड पर क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठ गईं. महिलाओं द्वारा इस तरह किसी सार्वजनिक मंच पर आंदोलन की बागडोर संभालना सिहोरा के इतिहास में पहली बार हुआ है. महिलाओं के इस अभूतपूर्व साहस और दृढ़ता ने न केवल आंदोलन को एक नई दिशा और नई ताकत दी है, बल्कि पूरे क्षेत्र में एक भावनात्मक लहर पैदा कर दी है. इन महिलाओं का क्रमिक अनशन पर बैठना यह दर्शाता है कि यह मांग अब केवल पुरुषों या राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिहोरा की हर गली और हर घर की आवाज बन चुकी है.
दरअसल, सिहोरा क्षेत्र के लोगों का लंबे समय से तर्क रहा है कि यह इलाका भौगोलिक, प्रशासनिक और जनसंख्या के हिसाब से जिला बनने की सभी अनिवार्य शर्तें पूरी करता है. स्थानीय लोगों को अपने छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए भी जबलपुर मुख्यालय तक लंबी यात्रा करनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है. जिला बनने से न केवल प्रशासनिक सुविधा बढ़ेगी, बल्कि विकास की गति भी तेज होगी.
दूसरे दिन, सिहोरा के व्यापारी, युवा, किसान और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य बस स्टैंड पर एकत्र हुए, जहां से स्वाभिमान वाहन रैली शुरू हुई. दुपहिया और चौपहिया वाहनों के साथ उमड़ा जनसैलाब सिहोरा को जिला बनाने की मांग वाले नारों से गूंज रहा था. रैली में शामिल हर व्यक्ति के चेहरे पर अपने क्षेत्र के विकास का सपना और सरकारी उपेक्षा के प्रति आक्रोश साफ झलक रहा था. शाम होते-होते इस रैली ने शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए यह साबित कर दिया कि सिहोरा की जनता अब निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार है.
महिलाओं की क्रमिक भूख हड़ताल ने आंदोलन को और भी अधिक नैतिक बल प्रदान किया है. महिलाएं मानती हैं कि जिला न होने के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं में जो कमी आती है, उसका सबसे अधिक खामियाजा उनके परिवारों और बच्चों को भुगतना पड़ता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक यह क्रमिक अनशन जारी रहेगा. इस कदम ने सिहोरा जिला आंदोलन को एक अभूतपूर्व जनउभार दे दिया है, जिसने अब प्रदेश के राजनीतिक मानचित्र पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है.
अब सबकी निगाहें प्रदेश सरकार पर टिकी हैं कि वह इस सशक्त और भावनात्मक आंदोलन पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या सिहोरा के लोगों का जिला बनने का सपना जल्द पूरा होगा.
