वर्षों बीत गए, जांच आयोगों की रिपोर्ट नहीं रखी पटल पर
सामाजिक सुरक्षा पेंशन, गैस त्रासदी, गोलीकांड व अन्य मामलों की रिपोर्टें पेश नहीं’
भोपाल। मध्यप्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन तथा राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना सहित कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच करने वाले आयोगों की रिपोर्टें वर्षों पहले प्राप्त हो चुकी हैं, लेकिन अब तक इन्हें विधानसभा के पटल पर प्रस्तुत नहीं किया गया है।
यह जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस विधायक आतिफ अकील के सवाल के लिखित जवाब में दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन एवं राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन में अनियमितताओं’’ की जांच हेतु 8 फरवरी 2008 को गठित आयोग की रिपोर्ट 15 सितंबर 2012 को मिल गई थी, लेकिन इस पर मंत्रिपरिषद समिति में परीक्षण कार्यवाही अभी प्रक्रियारत है। इसलिए इसमें दोषियों के बारे में कुछ कहना संभव नहीं है। गैस त्रासदी, गोलीचालन, मुठभेड़ और विस्फोट जांच भी लंबित होना बताया गया है।
इसलिए विधानसभा के पटल पर नहीं रखी रिपोर्टे
सरकार का कहना है कि सभी आयोगों की रिपोर्टें संबंधित विभागों गृह विभाग, गैस राहत विभाग तथा मंत्रिपरिषद समिति में परीक्षण और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में अटकी हुई हैं। इन प्रक्रियाओं के पूर्ण न होने के कारण रिपोर्टें अब तक विधानसभा में पेश नहीं हो सकी हैं। वर्षों पुरानी इन रिपोर्टों के लंबित रहने पर विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार ने आश्वासन दिया है कि विभागीय कार्यवाही पूरी होते ही प्रतिवेदन विधानसभा में प्रस्तुत किए जाएंगे।
जांच रिपोर्ट तो मिली, लेकिन जारी है कार्रवाई
भोपाल यूनियन कार्बाइड गैस रिसाव (2010 का आयोग), रिपोर्ट 24 फरवरी 2015 को प्राप्त गैस राहत विभाग में कार्यवाही जारी। वहीं भिंड गोलीचालन जांच (12 जुलाई 2012 का आयोग) की रिपोर्ट 31 दिसंबर 2017 को प्राप्त हुई, लेकिन गृह विभाग कार्यवाही कर रहा है। ग्वालियर मानमंदिर पुलिस मुठभेड़ (17 अगस्त 2015 का आयोग) की रिपोर्ट 9 जनवरी 2017 को प्राप्त हुई, लेकिन गृह विभाग में कार्यवाही प्रचलित होने के कारण पटल पर रिपोर्ट नहीं रखी गई। इसी तरह झाबुआ (पेटलावद) विस्फोट जांच (12 जून 2015 का आयोग) की रिपोर्ट 11 दिसंबर 2015 को मिली, वहीं गृह विभाग की कार्यवाही लंबित है। मंदसौर घटना जांच (12 जून 2017 का आयोग) की रिपोर्ट 11 जून 2018 को प्राप्त हुई लेकिन ’गृह विभाग में कार्रवाई जारी होने के चलते पटल पर नहीं रखी गई।
