अजाक्स में घमासान, संतोष वर्मा को बताया फर्जी अध्यक्ष
मुकेश मौर्य ने खुद को बताया प्रांताध्यक्ष, सरकार तक पहुंचा विवाद
भोपाल। ब्राह्मण बेटियों को लेकर विवादित बयान देने वाले अजाक्स संघ के प्रांताध्यक्ष आईएएस संतोष वर्मा के अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर संगठन दो हिस्सों में बंट गया है। विवादित बयान को लेकर पहले से घिरे वर्मा पर अब अध्यक्ष पद को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं सरकार ने वर्मा को नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा है, वहीं संगठन के भीतर मुकेश मौर्य ने खुद को असली अध्यक्ष बताते हुए संतोष वर्मा को ’फर्जी अध्यक्ष’ करार दिया है।
अजाक्स के चौधरी मुकेश मौर्य ने दावा किया कि उन्होंने पहले ही मुख्यमंत्री और रजिस्टर फर्म सोसायटी को लिखित शिकायत दी है कि संतोष वर्मा का संगठन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें ही प्रांताध्यक्ष चुना गया था और इसके सबूत उनके पास हैं। इसके साथ ही उन्होंने जेएन कंसोटिया पर 20 साल से संगठन पर कब्जा जमाए रखने और 65 लाख रुपए के गबन का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस मामले में जल्द कार्रवाई हो सकती है। मौर्य का कहना है कि अगर सरकार और रजिस्टर फर्म सोसायटी समय रहते शिकायत पर ध्यान देती, तो इस तरह के विवाद खड़े ही नहीं होते। संतोष वर्मा का अजाक्स से कोई लेना-देना नहीं है। वे फर्जी अध्यक्ष हैं।
जुलाई 23 से चल रहा विवाद
चौधरी मुकेश मौर्य का कहना है कि संगठन को लेकर जुलाई 2023 से विवाद चल रहा है। कंसोटिया सरकार में बड़े अधिकारी होने के चलते मनमानी चलाते रहे, उन्होंने संगठन को संगठित होकर सभी के समन्वय से चर्चा कर कोई कार्य नहीं किया। सेवानिवृत्त होने के बाद संतोश वर्मा को उन्होंने प्रांताध्यक्ष घोषित कर दिया, इसके लिए चुनाव प्रक्रिया को भी नहीं अपनाया।
विवादित बयान पर बढ़ी मुश्किलें
ब्राह्मण बेटियों पर दिए विवादित बयान को लेकर घिरे आईएएस संतोष वर्मा पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि वर्मा का बयान भारतीय प्रशासनिक सेवा के अपेक्षित आचरण के खिलाफ है और इसे ’अनुशासनहीनता व गंभीर कदाचार’ की श्रेणी में माना गया है। उनसे सात दिनों में जवाब मांगा गया है, अन्यथा अखिल भारतीय सेवा नियम 1969 के तहत कार्रवाई तय है।
गोपाल भार्गव करेंगे मुख्यमंत्री से मुलाकात
पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाते नजर आए। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन से मिलकर कठोर कार्रवाई की मांग करेंगे। भार्गव ने कहा कि जो अधिकारी महिला शोषण के आरोपों में घिरा हो, जिस पर चरित्रहीनता के आरोप लगे हों और जिसने फर्जी हस्ताक्षर कराए हों, वह आईएएस कैसे बन गया? ऐसे अधिकारी का आईएएस अवॉर्ड वापस होना चाहिए।
उप मुख्यमंत्री भी हुए खफा
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर कहा कि एक आईएएस अधिकारी द्वारा बहन एवं बेटियों को लेकर की गई टिप्पणी अत्यंत आपत्तिजनक, असंवेदनशील और समाज में अनावश्यक विभाजन पैदा करने वाली है। किसी भी समाज के बहन एवं बेटियों के विरुद्ध ऐसी टिप्पणी विकृत मानसिकता का परिलक्षण है। एक उच्च पद पर बैठे अधिकारी से ऐसे विचार न केवल सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचाते हैं बल्कि प्रशासनिक गरिमा पर भी प्रश्न उठाते हैं। सरकार की स्पष्ट मान्यता है कि किसी भी जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी द्वारा मातृशक्ति के विरुद्ध ऐसी टिप्पणी करना सामाजिक समरसता और संवैधानिक मर्यादा दोनों के विरुद्ध है। इसी आधार पर सरकार द्वारा उनसे बयान पर स्पष्टीकरण मांगा गया है जो संतुष्टि प्रदायक न होने पर आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।
