प्रदेश के सात शहरों में धूल-धुएं से बिगड़ी हवा
मुख्य सचिव सख्त, 30 नवंबर तक मांगा एक्शन प्लान
भोपाल। राजधानी सहित इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में धूल व धुएं ने हवा को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है। प्रदेश की सात बड़े नगर निगमों भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, सागर और देवास उच्च प्रदूषण वाले शहरों की सूची में शामिल हो गए हैं। इस पर चिंतित राज्य सरकार ने वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए नगर निगमों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
मंत्रालय में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी नगर निगम आयुक्तों और कलेक्टरों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्पष्ट निर्देश दिए कि 30 नवंबर तक शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म एक्शन प्लान अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और नगरीय प्रशासन विभाग को समयसीमा में कार्ययोजना सौंपना सुनिश्चित किया जाए।
पराली, धूल और धुएं पर अब सख्ती
मुख्य सचिव ने पराली जलाने पर ’ठोस रोक’ लगाने के लिए नयी रणनीति तैयार करने को कहा। इसके साथ ही वाहनों, निर्माण कार्यों और कचरा जलाने से होने वाले प्रदूषण के लिए अलग-अलग प्लान बनाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि शहरों की सड़कों पर ’धूल रोकने के लिए मरम्मत, नियमित सफाई और गुणवत्ता सुधार’ को प्राथमिकता दी जाए। खराब सड़क निर्माण पर जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई करने पर भी जोर दिया।
निर्माण कार्यों से फैलने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण
सभी निर्माण स्थलों पर नेट लगाना, नियमित पानी छिड़काव, प्रदूषण नियंत्रण के अनिवार्य प्रावधानों का पालन करना सुनिश्चित किया जाए। बड़े और छोटे सभी निर्माण कार्यों में प्रदूषण रोकने के स्पष्ट मापदंड कार्ययोजना में शामिल हों।
वायु गुणवत्ता मानक 100 के नीचे लाएं
मुख्य सचिव ने कहा कि जिन शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर ठीक नहीं है, उनका पूरा ध्यान वायु गुणवत्ता को औसत मानक 100 से नीचे होना चाहिए। नगर निगम ध्यान दें कि कचरा जलाने पर शत-प्रतिशत रोक हो, निर्माण कार्यों से धूल न उठे और सड़कों का सुधार और पुनःनिर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ करें। उन्होंने अलाव-तंदूर जैसे कारकों को इलेक्ट्रिक किया जाए। धूल वाले स्थानों पर नियमित रूप से जल के छिड़काव करने के साथ ही पीयूसी प्राप्त वाहनों का संचालन के लिए विशेष जांच अभियान चलाया जाए।
