प्रदेश कॉलेजों पर एक करोड़ का बिजली बिल बकाया
बिजली कंपनी के नोटिस के बाद सक्रिय हुआ उच्च शिक्षा विभाग
भोपाल। मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने प्रदेश के सरकारी कॉलेजों पर करीब एक करोड़ रुपये की बिजली रिकवरी निकाल दी है। इसे देख विभाग में हड़कंप मचा। विभाग ने जब जांच कराई तो पता चला कि पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने विभाग के नाम पर 1270 बिजली मीटर दर्ज बताए हैं, जबकि वास्तव में उच्च शिक्षा विभाग के अधीन सिर्फ 568 कॉलेज ही संचालित हैं। इनमें से 762 मीटर कॉलेज प्राचार्यों के नाम पर पंजीकृत हैं, जबकि 508 मीटर संदिग्ध पाए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, ये संदिग्ध मीटर वास्तव में स्कूल शिक्षा विभाग के स्कूलों और तकनीकी शिक्षा विभाग के पॉलीटेक्निक कॉलेजों में लगे हुए हैं, जिनका बिजली बिल उच्च शिक्षा विभाग के खातों से वसूला जा रहा है। पॉवर कंपनी ने विभाग को 4 करोड़ 28 लाख 4 हजार 330 रुपये का बिल थमाया है। जब इतनी बड़ी राशि का ब्योरा सामने आया तो अधिकारियों को संदेह हुआ कि प्रदेश में विभाग के इतने कॉलेज हैं ही नहीं। इसके बाद विभाग ने सूची का एक-एक कॉलेज स्तर पर सत्यापन शुरू किया।
विवाद के बीच जारी है पत्राचार
विभाग ने सभी प्राचार्यों को अपने-अपने कॉलेजों के बिजली बिल जमा करने के निर्देश जारी किए, जिसके तहत अब तक 3 करोड़ 14 लाख 71 हजार 82 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि अभी भी 1 करोड़ 13 लाख 33 हजार 248 रुपये का बिल बकाया है। बिजली कंपनी लगातार विभाग पर बकाया राशि चुकाने का दबाव बना रही है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि जब उनके कॉलेजों ने बिजली का उपयोग ही नहीं किया है, तो वे भुगतान क्यों करें। इस विवाद को लेकर दोनों विभागों के बीच पत्राचार जारी है और फिलहाल मामले की जांच जारी है।
