बच्चों की मौत के आंकड़े छिपा रही सरकार
कफ सिरप बनाने वाली कंपनी पर दर्ज किया जाए हत्या का मामला
भोपाल। छिंदवाड़ा में कफ सिरप से मासूमों की मौत का मामला प्रदेश में गरमाया हुआ है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जानलेवा कफ सिरप मामले में सरकार पर निशान साधा है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों की तो जादूगर है यह भाजपा सरकार, जिस तरह बच्चे वेंटिलेटर पर हैं, उसकी सही जानकारी सरकार दे भी नहीं रही और आंकड़े भी छिपा रही है। सरकार को यह सोचना चाहिए कि बच्चों की जान की रक्षा कैसे की जाए और उन्हें तत्काल उचित उपचार कैसे उपलब्ध कराया जाए।
सिंघार ने कहा कि प्रदेश में रोज छोटे बच्चों की मौत हो रही है और कई बच्चे गंभीर रूप से बीमार हैं। उन्होंने कहा कि आखिर और कितने बच्चों की मौत होगी। सिंघार ने कहा कि परासिया विधानसभा में 25 हजार बच्चे हैं, क्या सभी को ट्रेस करेंगे और उनकी जांच कराएंगे। जैसे कोरोना काल में जांच हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीब परिवार के बच्चों को बचाना नहीं चाहती। सरकार बच्चों की मौत के आंकड़े भी छुपा रही है। उन्होंने कहा कि जानकारी मिली है कि कई बच्चे अभी वेंटीलेटर पर हैं। उन्होंने कहा कि यह एक बेहद दुखद घटना है। सरकार को मदद के नाम पर किसी मां की कोख का सौदा नहीं करना चाहिए। मेरी मांग है कि सरकार तत्काल पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करे।
सरकार की योजनाएं केवल कागजों में चल रही
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की है कि जानलेवा कफ सिरप बनाने वाली कंपनी पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं केवल कागजों में चल रही हैं और कई गांवों में डॉक्टर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। सिंघार ने कहा कि सालों से भाजपा की सरकार है लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
राहुल गांधी भी पहुंच सकते हैं छिंदवाड़ा
छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत के मामले को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के मध्यप्रदेश दौरे की अटकलें तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी 11 या 12 अक्टूबर को छिंदवाड़ा पहुंच सकते हैं। अपने इस दौरे के दौरान वे परासिया क्षेत्र में जाकर उन परिजनों से मुलाकात करेंगे जिनके बच्चों की मौत कथित तौर पर कफ सिरप पीने से हुई थी। संभावना जताई जा रही है कि उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी उपस्थित रहेंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी का यह दौरा न केवल पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताने के लिए होगा, बल्कि प्रदेश में हो रही दवा आपूर्ति और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बदहाली पर भी बड़ा राजनीतिक संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है।
