राजधानी के दवा बाजार में मारा छापा, अमानक कफ सिरप किया जब्त
भोपाल। छिंदवाड़ा जिले में कफ सिरप से मासूम बच्चों की मौत के बाद एमपी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (औषधि प्रशासन) द्वारा छापेमारी जारी है। इस कड़ी में ड्रग विभाग द्वारा राजधानी भोपाल के दवा बाजार में छापेमार कार्रवाई अमानक कफ सिरप को जब्त किया गया।
दरअसल छिंदवाड़ा में मासूम बच्चों की मौत के बाद मेडिकल स्टोर से लेकर जगह-जगह कोल्ड्रिफ सिरप और अमानक दवाइयों की जांच की जा रही है। इसी कड़ी में भोपाल के दवा बाजार में ड्रग्स (औषधि प्रशासन) का छापा मारकर रेस्पिफ्रेस डी और ए एनएफ कफ सिरप को जपब्त किया। सैंपल के लिए 10 बोतल को सील किया, बाकी 80 बोतल को भी टीम अपने साथ ले गई। ड्रग्स प्रशासन को दो और कफ सिरप री लाइफ और रेस्पिफ्रेस टीआर में खतरनाक केमिक डायएथिलिन ग्लाइकॉल की अधिक मात्रा पाई मिली थी।
किडनी फेल, ब्रेन डैमेज होने का खतरा
मध्यप्रदेश फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था। छिंदवाड़ा में लिए 19 दवाओं के नमूने की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है। ये दोनों सिरप गुजरात में बनाए गए। यह वही केमिकल है,जो कोल्ड्रिफ कफ सिरप में मिले थे। दोनों सिरप पर तत्काल रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई। कफ सिरप में अधिकतम 0.1 प्रतिशत डायएथिलिन ग्लाइकॉल की मौजूदगी हो सकती है। इन सिरप से किडनी फेल, ब्रेन डैमेज होने का खतरा रहता है।
अब प्रदेशभर में जांच अभियान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेशभर में अमानक दवाओं पर विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है, सभी दवा विक्रेताओं और डिस्ट्रीब्यूटरों से प्रतिबंधित सिरप की स्टॉक रिपोर्ट तलब करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में औषधि निरीक्षकों को छापेमारी के आदेश जारी किए गए हैं।
कांग्रेस निकालेगी कैंडल मार्च
कांग्रेस 9 अक्टूबर को प्रदेश भर में बच्चों को श्रद्धांजलि देने कैंडल मार्च निकालेगी। छिंदवाड़ा में मृतक बच्चों के परिजनों से मुलाकात के बाद भोपाल लौटे प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मामले में कई गंभीर सवाल उठाए हैं। पटवारी ने पूछा कि आखिर इतने गंभीर मामले के बाद भी स्वास्थ्य मंत्री और उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, प्रभारी मंत्री राकेश सिंह और स्वास्थ्य विभाग का एक भी बड़ा अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभारी मंत्री जिले-जिले सिर्फ कमीशन लेने जाते हैं, उन्हें आदिवासी, गरीब, बच्चों से कोई लेना देना नहीं है।
