अब विश्वविद्यालयों में सिखाई जाएगी भारतीय भाषाएं
हिंदी में मेडिकल, इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा विभा की नई पहल
भोपाल। प्रदेश में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी में शुरू करने के बाद अब उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब पारंपरिक विषयों के साथ-साथ भारतीय भाषाओं से जुड़े कोर्स भी संचालित किए जाएंगे। यह पहल न केवल भाषाई विविधता को बढ़ावा देगी, बल्कि देशभर में भाषाई एकता का संदेश भी देगी।
इस दिशा में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के 17 सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को भारतीय भाषाएं आवंटित कर दी गई हैं। इसके तहत प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक या अधिक भारतीय भाषाओं के कोर्स संचालित किए जाएंगे। विभाग द्वारा इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने इस पहल के तहत विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ बैठक कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में भारतीय भाषाओं को पढ़ाने हेतु पाठ्यक्रम, सिलेबस और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई।
चार कुलपतियों की समिति का गठन
भाषाई शिक्षा की इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए चार विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की एक समिति गठित की गई है। यह समिति भारतीय भाषाओं को सिखाने के लिए पाठ्यक्रम निर्माण, सिलेबस निर्धारण और क्रियान्वयन की पूरी रूपरेखा तैयार करेगी। बैठक में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए। मंत्री परमार ने अधिकारियों और कुलगुरुओं के साथ मिलकर इस दिशा में ठोस कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
छिंदवाड़ा विवि में तमिल, मराठी, जबलपुर में तेलगू, पंजाबी भाषा सीखेंगे विद्यार्थी
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल को तमिल भाषा, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर को कन्नड़ भाषा, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इन्दौर को मराठी एवं तेलगू भाषा, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर को तेलगू एवं पंजाबी भाषा, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा को सिंधी और गुजराती भाषा, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन को मलयालम, सिंधी और असमिया भाषा, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर को गुजराती भाषा, राजा शंकरशाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा को तमिल और मराठी भाषा, पंडित शंम्भूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय शहडोल को बांग्ला भाषा, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगौन को गुजराती भाषा, महात्मा गाँधी विश्वविद्यालय चित्रकूट को उड़ियाभाषा और महर्षि पाणिनी विश्वविद्यालय उज्जैन को उड़िया भाषा सिखाने के लिए भाषा का आवंटन किया गया है।
