कॉलेजों में शिक्षकों की कमी, छात्रों की पढ़ाई पर असर’
भोपाल। मध्य प्रदेश के शासकीय कॉलेजों में प्राध्यापकों की भारी कमी शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित कर रही है। प्रदेशभर में हजारों की संख्या में सहायक प्राध्यापकों के पद रिक्त हैं, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है। वहीं, भर्ती प्रक्रिया की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश के कॉलेजों में वर्तमान में सात हजार से अधिक सहायक प्राध्यापकों के पद खाली हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 16,289 पद रिक्त रहे, लेकिन सरकार और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) सिर्फ 22 प्रतिशत यानी 3,599 पदों पर ही भर्ती कर सके। वर्ष 2022 में 3,715 रिक्तियों के लिए मात्र 1,669 पदों का विज्ञापन जारी किया गया था। वहीं 2024 में 7,284 पद खाली’’ रहने के बावजूद सिर्फ 1,930 पदों की भर्ती निकाली गई।
गौरतलब है कि प्रदेश में कुल 569 शासकीय महाविद्यालय हैं, जिनमें 2024 तक 12,895 सहायक प्राध्यापक पद स्वीकृत थे। इनमें से केवल 5,611 प्राध्यापक ही कार्यरत हैं।
इन विश्वविद्यालयों में एक भी सहायक प्राध्यापक नहीं
पांच विश्वविद्यालयों राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय, छिंदवाड़ा, क्रांतिवीर तात्याटोपे विश्वविद्यालय, गुना, क्रांति सूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय, खरगोन, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर और रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय, सागर में एक भी सहायक प्राध्यापक कार्यरत नहीं है।
