नहीं थम रहे लव जिहाद के मामले, 73 नाबालिग बालिकाएं बनीं शिकार
धर्मांतरण प्रतिबंध अधिनियम लागू होने के बाद भी 283 मामले आए सामने
भोपाल। प्रदेश में धर्मांतरण प्रतिबंध अधिनियम लागू होने के बावजूद लव जिहाद के मामलों में कोई खास कमी देखने को नहीं मिल रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन मामलों में बड़ी संख्या में नाबालिग बालिकाएं भी शिकार बन रही हैं।
विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि वर्ष 2020 से अब तक प्रदेश में लव जिहाद से जुड़े कुल 283 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 73 घटनाओं में पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन मामलों में 173 प्रकरण अब भी न्यायालयों में विचाराधीन’’ हैं। यह समस्या न केवल बड़े शहरों तक सीमित है, बल्कि छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों में भी लगातार सामने आ रही है।
मालवा-निमाड़ बना लव जिहाद का गढ़
प्रदेश के मालवा और निमाड़ क्षेत्र इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित रहे हैं। इंदौर शहर में सबसे ज्यादा 55 मामले, जबकि इंदौर ग्रामीण क्षेत्र में 16, धार में 13, झाबुआ में 3, खरगोन में 10, खंडवा में 12, बड़वानी में 4, और बुरहानपुर में 3 मामले दर्ज किए गए। अन्य जिलों की बात करें तो उज्जैन में 12, देवास में 3, शाजापुर में 8, आगर में 5, मंदसौर में 4, रतलाम व नीमच में 3-3, ग्वालियर में 6, गुना और अशोकनगर में 3-3, भिंड में 2, जबलपुर में 5, छिंदवाड़ा में 4, नरसिंहपुर में 2, सिवनी में 7, सागर में 2, दमोह में 3, टीकमगढ़ में 2, छतरपुर में 11, रीवा में 5, सतना में 2, मैहर में 1, शहडोल, अनूपपुर और नर्मदापुरम में 2-2, हरदा में 6, बैतूल में 5, रायसेन में 1, ’’भोपाल नगरीय क्षेत्र में 33’’, सीहोर में 8, राजगढ़ में 5, बालाघाट में 2, जबकि विदिशा, मंडला और डिंडोरी में एक-एक मामला दर्ज किया गया है।
चार प्रमुख शहरों की स्थिति इस प्रकार
राज्य के चार बड़े शहरों में लव जिहाद के दर्ज मामलों की संख्या चिंताजनक है। जबलपुर और ग्वालियर को छोड़ दिया जाए तो इंदौर, भोपाल इसके आंकड़े चौकाने वाले सामने आए है। राज्य के इंदौर में लव जिहाद के 55 मामले, भोपाल में 33 मामले, .ग्वालियर में 6 मामले और जबलपुर में 5 मामले सामने आए हैं।
50 मामलों में आरोपी हो चुके बरी
86 मामले ऐसे हैं, जिसमें पुलिस की जांच हो चुकी है। जांच के बाद ऐसे मामलों में कोर्ट ने या तो फैसला सुना दिया है या फिर ऐसे मामलों में समझौता हो चुका है। 86 मामलों में सबसे चौंकाने वाले 50 मामले हैं। इन 50 मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया गया है। यानी कुल मिलकार अभी तक सिर्फ 7 मामलों में ही आरोपियों को सजा हो सकी, इसमें से एक मामले में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। जिन 7 मामलों में आरोपियों को सजा हुई, उसमें पीड़िता नाबालिग है।
10 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान
मध्यप्रदेश में धर्मांतरण प्रतिबंध अधिनियम 2021 के तहत जबरन या छलपूर्वक धर्म परिवर्तन कराने पर अधिकतम 10 वर्ष की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। यह अधिनियम सामूहिक धर्मांतरण पर भी लागू होता है। कानून के अनुसार, कोई भी व्यक्ति धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे कम से कम 60 दिन पहले संबंधित जिले के जिला मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना देना अनिवार्य है।
