सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कई पद रिक्त, पढ़ाई हो रही प्रभावित
भोपाल। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया भले ही शुरू हो गई हो, लेकिन चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर संकट लगातार गहराता जा रहा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, परंतु कॉलेजों की शैक्षणिक व्यवस्था में अपेक्षित सुधार अब तक नहीं हो पाया है।
राज्य के करीब दर्जनभर शासकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों के पद लंबे समय से रिक्त हैं, जिससे न केवल मेडिकल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं भी चरमराई हुई हैं। प्रदेश में वर्तमान में 14 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक डेंटल कॉलेज और एक मानसिक चिकित्सालय संचालित हो रहे हैं। इन संस्थानों में कुल 2,917 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 2,096 पदों पर ही नियुक्तियां हुई हैं। शेष 821 पद अभी भी रिक्त हैं। स्थिति यह है कि नए मेडिकल कॉलेज तो खोले जा रहे हैं, लेकिन वहां शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है, जिससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों की कमी से न केवल मेडिकल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है, बल्कि दीर्घकालीन रूप से यह प्रदेश में योग्य डॉक्टरों की संख्या पर भी असर डालेगा। स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है, जहां मरीजों को विशेषज्ञ इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
रिक्त पदों की स्थिति
प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर के 431 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 138 पद रिक्त हैं इसी तरह एसोसिएट प्रोफेसर के 730 पद स्वीकृत है, जबकि 206 पद रिक्त हैं। वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर के 1192 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 356 पद रिक्त हैं। डिमॉन्सट्रेटर के 535 पद स्वीकृत है, जिनमें से 123 पद रिक्त हैं।
