स्कूलों की बदहाली की पोल खोलने एनएसयूआई ने चलाया अभियान
भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदहाली को उजागर करने और सरकार से जवाब मांगने के लिए एनएसयूआई की प्रदेश इकाई ने स्कूलों की पोल खोल अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों की जमीनी सच्चाई को सामने लाना और बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के यू-डाइस डेटा और हाल ही में हुई पीएबी (प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड) बैठक में प्रस्तुत राज्य रिपोर्ट ने मध्यप्रदेश की स्कूली शिक्षा की भयावह स्थिति को उजागर किया है। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार केवल स्कूलों के नाम बदलने में व्यस्त है, जबकि वास्तविकता यह है कि बच्चों के सिर पर ढंग की छत तक नहीं है। चौकसे ने चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए बताया कि प्रदेश के 12,200 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है। इसके अतिरिक्त, 9,500 स्कूल आज भी बिजली से वंचित हैं और 1,700 से अधिक स्कूलों में शौचालय नहीं हैं। यह स्थिति प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की जर्जर हालत को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
इस अभियान के तहत, एनएसयूआई ने एक व्हाट्सएप नंबर जारी किया है। इस नंबर पर छात्र, अभिभावक और जागरूक नागरिक अपने क्षेत्र के स्कूलों की तस्वीरें, वीडियो और संबंधित समस्याएं भेज सकते हैं। एनएसयूआई इन सभी तथ्यों को एकत्र कर सरकार को घेरने और शिक्षा बजट के सही उपयोग की मांग को लेकर दबाव बनाएगी।
