जेल की ऊंची दीवारों के पीछे ख्वाबों ने ली नई उड़ान
केंद्रीय जेल में महिला बंदियों ने सीखा संवाद, संवेदना और सपनों को संवारने का हुनर
भोपाल। जहां चारों ओर ऊँची दीवारें हैं, वहीं कुछ आंखों ने उम्मीद की खिड़की खोल दी। भोपाल की केंद्रीय जेल के महिला वार्ड में आयोजित एक अनोखी कार्यशाला ने महिलाओं के जीवन में रंग भर दिए वो महिलाएं जो कभी टूटी उम्मीदों के सहारे अपनी सजा काट रही थीं, अब अपनी नई पहचान गढ़ने की ओर अग्रसर हैं।
मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग और तिनका-तिनका फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला का विषय था “टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से सुधार और व्यक्तित्व विकास”। इस मौके पर महिला बंदियों ने न केवल संवाद, कला और आत्म-अभिव्यक्ति के गुर सीखे, बल्कि अपनी ज़िंदगी की अधूरी कहानियों को कागज़ पर उकेरा। जेल की दीवारों के भीतर जब चित्रों में ‘जेल में सपना’, ‘जेल में उत्सव’ और ‘जेल में रेडियो’ जैसे विषयों पर भावनाएं सजीं, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं, लेकिन उनमें एक गर्व भी था एक बदलाव का साक्षी बनने का गर्व।
हर परिस्थिति में डटे रहना ही नारी शक्ति
कार्यक्रम की सूत्रधार और तिनका-तिनका फाउंडेशन की अध्यक्ष वर्तिका नंदा ने कहा कि हर परिस्थिति में डटे रहना ही असली नारी शक्ति है। सीखते रहना और आगे बढ़ते रहना ही जीत है। वहीं राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव सुरेश तोमर ने बताया कि महिला बंदियों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं और इन्हें प्रदेशभर में विस्तार देने की योजना है।
जेल में महससू होती है आज़ादी
56 वर्षीय पुतलीबाई, जो कभी अनपढ़ थीं, आज न सिर्फ अख़बार पढ़ती हैं, बल्कि टीवी की खबरें समझती हैं और चित्रकला में भी हाथ आजमा रही हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि मेरा जीवन बहुत कठिन था, लेकिन यहां मैंने अपने भीतर की शक्ति को पहचाना है। परिवार में औरत की ज़िंदगी बहुत कठिन होती है, पर यहां मुझे आज़ादी महसूस होती है।
फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं
किन्नर समुदाय से आने वाली कल्पना का आत्मविश्वास देखते ही बनता है। उन्होंने कहा, कि बाहर हमारे साथ भेदभाव होता है, यहां नहीं। यहां पढ़ाई की, कुछ नया करने की प्रेरणा मिली। अब बाहर जाकर फैशन डिज़ाइनर बनना है।
बच्चों को पालूंगी, खेतों में मेहनत करूंगी
सुनीता बाई ने अपने पश्चाताप को शब्दों का रूप देते हुए कहा कि मुझसे गलती हुई, उसका पछतावा है। यहां रहकर मैंने बागवानी सीखी है। अब बाहर जाकर खेती करूंगी और अपने बच्चों को बेहतर भविष्य दूंगी।
