तकनीकी योग्यता परीक्षा से तय होगी इंजीनियरों की जिम्मेदारी
लोक निर्माण विभाग की नई पहल
भोपाल। प्रदेश में कार्यरत लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के इंजीनियरों को अब बड़े प्रोजेक्ट्स, खासतौर पर ब्रिज निर्माण कार्यों की निगरानी से पहले अपनी तकनीकी योग्यता का प्रमाण देना होगा। विभाग इंजीनियरों की काबिलियत जांचने के लिए नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है, जिसके तहत उन्हें एक एलिजिबिलिटी परीक्षा देनी होगी।
यह फैसला भोपाल के ऐशबाग में 90 डिग्री मोड़ वाले ओवरब्रिज और इंदौर में झेड-शेप ब्रिज के निर्माण को लेकर उठे सवालों के बाद लिया गया है। इन परियोजनाओं की डिज़ाइन और निर्माण गुणवत्ता को लेकर भारी आलोचना हुई, जिससे विभाग की साख पर असर पड़ा। पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री, सहायक यंत्री और उपयंत्री स्तर के इंजीनियरों को कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड्स और तकनीकी नियमों पर आधारित परीक्षा देनी होगी। वहीं, चीफ इंजीनियर और सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर को केवल अध्ययन अनिवार्य होगा। यह परीक्षा 15 अगस्त के बाद आयोजित की जाएगी।
परीक्षा क्यों जरूरी
सड़क, भवन और ब्रिज जैसी अधोसंरचना परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय मानक कोड, नेशनल बिल्डिंग कोड और इंडियन रोड कांग्रेस के नियमों का पालन करना अनिवार्य है। लेकिन कई मामलों में इन मानकों की अनदेखी के कारण घटिया निर्माण की शिकायतें सामने आई हैं।
परीक्षा के मुख्य उद्देश्य
इंजीनियरों की तकनीकी जानकारी और क्षमता का मूल्यांकन, फील्ड पोस्टिंग और प्रोजेक्ट आवंटन में पारदर्शिता, गुणवत्ता नियंत्रण और कार्यकुशलता में सुधार, एनुअल परफॉर्मेंस रिव्यू, प्रशिक्षण आवश्यकताओं और विशेष जिम्मेदारियों का निर्धारण, इस नई व्यवस्था से विभाग को उम्मीद है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में सुधार होगा और योग्य इंजीनियरों को ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
