अतिथि विद्वानों की मांगें अब भी अधूरी, सरकार से स्थायी नियुक्ति की गुहार
भोपाल। प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत हजारों अतिथि विद्वानों के बीच एक बार फिर असंतोष दिखाई दे रहा है। वर्षों से नियमित शिक्षकों की तरह सेवाएं देने के बावजूद उन्हें अब भी अतिथि कहा जाना और स्थायित्व न मिलना उनके रोष का कारण बना हुआ है।
हाल ही में उच्च शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए अतिथि विद्वानों की सेवाएं यथावत रखने का आदेश जारी कर दिया है। हालांकि, उनकी स्थायी नियुक्ति, फिक्स वेतन और समायोजन जैसी लंबित मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे विद्वानों में निराशा व्याप्त है। अतिथि विद्वान महासंघ ने सरकार से अपील करते हुए कहा है कि उन्हें “दिहाड़ी मजदूरी“ जैसी अस्थिर स्थिति से मुक्त किया जाए और अतिथि जैसी असमान पदवी को समाप्त किया जाए। महासंघ ने यह भी मांग की कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उस समय के उच्च शिक्षा मंत्री एवं वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा की गई घोषणाओं को अमल में लाया जाए।
उल्लेखनीय है कि नए सत्र की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें पूर्ववत कार्यरत अतिथि विद्वानों को उन्हीं सेवा शर्तों पर कार्य जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में विद्वान समुदाय सरकार से जल्द ठोस नीति बनाने की अपेक्षा कर रहा है, जिससे उन्हें न्याय और सम्मानपूर्ण रोजगार मिल सके।
