हाईकोर्ट में जवाब देने की तैयारी में जुटा सामान्य प्रशासन विभाग
भोपाल। राज्य सरकार की नई पदोन्नति नीति को लेकर हाईकोर्ट में दायर एक याचिका ने शासन को असहज स्थिति में डाल दिया है। कोर्ट ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि वर्तमान पदोन्नति नीति, पूर्व में लागू नीति से किस प्रकार भिन्न है। इसे लेकर सामान्य प्रशासन विभाग अब जवाब देने की तैयारी में जुटा है।
सामान्य प्रशासन विभाग इस संबंध में विस्तृत जवाब तैयार कर रहा है। विभाग दोनों नीतियों के बीच अंतर को दर्शाने के लिए एक तुलनात्मक चार्ट भी बना रहा है, जिसे कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। कोर्ट यह जानना चाहता है कि 2016 में रद्द की गई आरक्षण आधारित पदोन्नति नीति के तत्वों को नई नीति में किस तरह शामिल किया गया है। सरकार की नई पदोन्नति नीति में अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए 20 प्रतिशत और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया है। हाईकोर्ट ने विशेष रूप से इन प्रावधानों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।
इस बीच, कई विभाग विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आयोजित करने की तैयारी कर रहे थे। कुछ विभागों में नए निर्वाचन अधिकारियों द्वारा डीपीसी आयोजित कर पदोन्नति के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। हालांकि, कोर्ट के निर्देश के बाद फिलहाल इन आदेशों पर अमल अगले आदेश तक रोका जा सकता है। अब पदोन्नति को लेकर स्थिति न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
