भाजपा की कार्यकारिणी नए चेहरों को मिलेगा मौका
सांसदों, विधायकों के बजाए निष्ठावान कार्यकर्ता को मिलेगी तरजीह
भोपाल। भाजपा में हाल ही में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद अब प्रदेश कार्यकारिणी के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कार्यकारिणी में स्थान पाने के इच्छुक नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है और पार्टी कार्यालय में उनकी आमद में भी इजाफा देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष इस बार सांसदों और विधायकों की बजाय संगठन में सक्रिय नए चेहरों और पुराने निष्ठावान कार्यकर्ताओं को तरजीह दे सकते हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा के हालिया सदस्यता अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं को कार्यकारिणी में जगह दी जा सकती है। इसके लिए अभियान का पूरा डेटा तैयार कर लिया गया है, जिसके आधार पर जिम्मेदारियां सौंपने की योजना है। प्रदेश भाजपा संगठन जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए कार्यकारिणी का गठन करेगा। पार्टी नेतृत्व इन दोनों वर्गों के संतुलन को साधने की रणनीति पर काम कर रहा है। संभावना है कि इन नए नेताओं को प्रदेश कार्यकारिणी के साथ-साथ मोर्चा, प्रकोष्ठ और प्रकोष्ठों में समायोजित किया जाएगा, ताकि पार्टी में संगठनात्मक संतुलन बना रहे और सभी वर्गों की अपेक्षाएं पूरी हो सकें।
नजर आ सकता है उम्र का मापदंड भी
नई कार्यकारिणी में एक बार फिर उम्र मानदंड को लेकर भी पार्टी सतर्क नजर आ रही है। हालांकि भाजपा ने आधिकारिक रूप से कोई आयु सीमा तय नहीं की है, लेकिन जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में ज्यादातर 60 वर्ष से कम आयु के कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई है। ऐसे में कार्यकारिणी में युवा नेतृत्व को भी प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है।
कांग्रेस से आए नेता बनेंगे अहम चुनौती
एक अहम चुनौती कांग्रेस से आए नेताओं को लेकर भी है। विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले कई वरिष्ठ और कनिष्ठ नेता भाजपा में शामिल हुए थे। इनमें से कुछ तो पार्टी में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन कई अब भी अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। पुराने भाजपाई नेताओं में उनके प्रति असहजता बनी हुई है, क्योंकि उनके आने से कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ता संगठन में हाशिए पर चले गए हैं।
