भाजपा में नई नियुक्तियों की सुगबुगाहट तेज
नए प्रदेश अध्यक्ष के सामने बड़ी चुनौती
भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की नियुक्ति के बाद अब पार्टी में राजनीतिक और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लंबे समय से लंबित निगम, मंडल, बोर्ड और दीनदयाल अंत्योदय समितियों में नियुक्तियों को लेकर दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ गई है।
प्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से ही राजनीतिक नियुक्तियां अटकी हुई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में की गई नियुक्तियां नई सरकार ने भंग कर दी थीं। अब एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी इन संस्थाओं में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद खाली हैं। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष के समन्वय और कार्यशैली की अग्नि परीक्षा मानी जा रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हेमंत खंडेलवाल किस तरह पार्टी को नई संरचना देते हैं और मोहन सरकार के साथ मिलकर राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को कितना तेजी से आगे बढ़ाते हैं।
राजनीतिक नियुक्तियों पर सभी की निगाहें
प्रदेश में सैकड़ों कार्यकर्ता और दावेदार लंबे समय से निगम, मंडल और बोर्डों में अवसर मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब यह जिम्मेदारी हेमंत खंडेलवाल के कंधों पर है कि वे पार्टी और सरकार के बीच समन्वय स्थापित कर इन नियुक्तियों को गति दें। ‘सबका साथ, सबका विकास’ की तर्ज पर उन्हें सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की चुनौती भी है।
संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव तय
राजनीतिक नियुक्तियों के साथ-साथ संगठन में भी बड़ा फेरबदल संभावित है। वर्ष 2020 में तत्कालीन अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा द्वारा गठित सात मोर्चों और विभिन्न प्रकोष्ठों की कार्यकारिणी का कार्यकाल पूरा हो चुका है। अब नए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को संगठन को नई ऊर्जा और दिशा देने के लिए नए सिरे से मोर्चा व प्रकोष्ठों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और कार्यकारिणी के सदस्यों की नियुक्ति करनी होगी।
दावेदारों की सक्रियता बढ़ी
चाहे संगठन में पद हो या निगम-मंडलों में, दावेदारों ने एक बार फिर अपने स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं की हलचल तेज हो गई है। हर कोई इस उम्मीद में है कि नई कार्यकारिणी और राजनीतिक नियुक्तियों में उन्हें भी मौका मिलेगा।
