आईएएस अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
प्रमोशन में आरक्षण पर गरमाई बहस
भोपाल। राजधानी में मंत्रालय में गुरुवार को आयोजित प्रमोशन में आरक्षण को लेकर उच्चस्तरीय प्रशासनिक बैठक अब विवादों में घिरती जा रही है। प्रमोशन में आरक्षण नीति को लेकर हुई इस बैठक में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से आने वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों द्वारा रखे गए विचारों पर सवर्ण, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के संगठनों ने तीखी आपत्ति दर्ज की है।
मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एसीएस जे.एन. कंसोटिया, पीएस गुलशन बामरा और एसीएस रश्मि शमी ने आरक्षण नीति के पक्ष में कई सुझाव रखे। इन अधिकारियों का कहना था कि जब पदों के अनुसार आरक्षण को घटाया जा सकता है, तो नीति में इसे बढ़ाने की संभावना का भी उल्लेख होना चाहिए। वहीं सूत्रों की मानें तो नीति बनने के बाद उस पर सवाल उठाना मुख्य सचिव अनुराग जैन को उचित नहीं लगा। उनका मानना था कि बैठक क्रियान्वयन के लिए बुलाई गई थी, न कि नीति पर पुनर्विचार के लिए।
हमारे आईएएस हमारे साथ किस दिन खड़े रहेंगे ?
सपाक्स संरक्षक हीरालाल त्रिवेदी ने कहा कि शासन की बैठक में किसी विशेष वर्ग की पैरवी करना अनुचित है। यदि किसी संगठन की मांग उठाई जा सकती है, तो सभी वर्गों के प्रतिनिधियों को भी बोलने का अवसर मिलना चाहिए था। वहीं, स्पीक संस्था के राजीव कुमार खरे ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हमारे ही वर्ग के आईएएस अधिकारी हमारे साथ नहीं, बल्कि हमारे खिलाफ खड़े हैं। किस दिन हमारे आईएएस हमारे साथ खड़े होंगे, हमको यह प्रश्न अपने आदरणियों से करना चाहिए।
