राइस मिलर्स और गुणवत्ता निरीक्षकों के खिलाफ दर्ज की एफआईआर
घटिया चावल को मानक बताकर गोदामों में जमा कराने का मामला
भोपाल। सिवनी जिले में खाद्य सुरक्षा से जुड़ा घोटाला उजागर हुआ है, जिसमें राइस मिलर्स और मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के अधिकारियों ने मिलकर आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू), जबलपुर ने इस मामले में 13 राइस मिलर्स और 2 गुणवत्ता निरीक्षकों के खिलाफ कई धाराओं में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 272, 120बी और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 शामिल हैं।
जांच से पता चला कि वर्ष 2018 में, इन राइस मिलर्स ने गुणवत्ता निरीक्षकों जगदीश गिरी गोस्वामी और विनय पाण्डेय के साथ मिलकर घटिया चावल को मानक चावल के रूप में दर्शाकर सरकारी गोदामों में जमा किया। यह घटिया चावल बाद में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से आम जनता को वितरित किया जाना था। ईओडब्ल्यू ने भोपाल से प्राप्त एक शिकायत के आधार पर जबलपुर इकाई में जांच शुरू की, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्रीय गुणवत्ता निरीक्षक दल की रिपोर्ट ने इस घोटाले का पर्दाफाश किया। जांच में पाए गए साक्ष्यों और दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ है कि मिलर्स और निरीक्षकों ने सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने और निजी लाभ कमाने के लिए धोखाधड़ी की। इस मामले में शामिल प्रमुख राइस मिल्स में अकबर राइस मिल, आर्यन राइस मिल, लक्ष्मी राइस इंडस्ट्रीज और अन्य शामिल हैं। ईओडब्ल्यू अब इस मामले की गहन जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
