राहुल गांधी के संगठन सृजन फार्मूले से कांग्रेस में मची हलचल
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जमीनी सक्रियता होगी नई कसौटी, पुराने नेताओं की भूमिका पर उठे सवाल
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस में संगठन सृजन को लेकर राहुल गांधी द्वारा अपनाई गई नई कार्यशैली और बयानों ने नेताओं की बेचैनी बढ़ा दी है। ’रेस’, ’बारात’ और अब ’लंगड़ा घोड़ा’ जैसे प्रतीकों के जरिये राहुल ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब निष्क्रिय और चुनावी रूप से विफल नेताओं को बख्शा नहीं जाएगा। खासकर वे नेता जो लंबे समय से पद लेकर बैठकों तक सीमित हैं या जो टिकट की दौड़ में तो आगे रहते हैं पर जनता के बीच नजर नहीं आतेकृउनकी मुश्किलें बढ़ना तय है।
राहुल गांधी ने रेस, बारात व लंगड़े घोड़े के अपने पुराने जुमले का प्रदेश में पहली बार उपयोग करके नेताओं को चिंता में डाल दिया है। इसमें लंगड़ा घोड़ा एक नया शब्द उन्होंने गढ़ा है। इसके जरिए लगातार चुनाव हारने वाले या भाजपा को फायदा पहुंचाने वाले काम करके कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहे नेताओं के लिये संकेत छिपा है। राहुल ने भोपाल में कांग्रेस के लगातार बैठकों के दौरान यह भी कहा है कि हमारे मैदानी लोग बहुत अच्छा काम करते हैं, लेकिन दो चार ऐसे नेता होते हैं जो अपनी बयानबाजी से सारा माहौल बिगाड़ देते है, इसका फायदा विरोधी दल को होता है। इस बात के पीछे यह भी संकेत दिया है कि हाल में जिन नेताओं ने आपत्तिजनक टिप्पणी की हैं, उन्हें कार्रवाई के दायरे में लिया जाएगा। जानकार सूत्र बताते हैं कि भोपाल में राहुल के दौरे के बाद अगला एक पखवाड़ा बहुत अहम है, इसमें तेजी से कुछ निर्णय होंगे। वहीं प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों में भी भी घबराहट है कि उनका भविष्य क्या होगा, इनमें कई टिकट के दावेदार हैं और कई पद बचाने की जुगत में हैं। सूत्रों की मानें तो भोपाल बैठक के पहले दिल्ली में प्रदेश के बारे में बारीकी से स्कैनिंग की गई है। इसमें कई नेताओं को उनके चुनावी कॅरियर, बयान आदि की कसौटी से परखा गया है। इसके अलावा निष्ठा के मामले में कम से कम पचास नेताओं को तौला गया है।
दिग्गजों की क्या होगी भूमिका
राहुल गांधी तो प्रदेश में संगठन सृजन का ष्शुभारंभ कर चले गए, मगर अब प्रदेश जब संगठन सृजन को लेकर कांग्रेस नेताओं में ज्यादा चिंता नजर आ रही है। इन्हें अभी से नए संगठन सृजन के आकार की चिंता ज्यादा सता रही है। चर्चा तो यह भी चल पड़ी है कि कांग्रेस के कुछ वरिश्ठ नेताओं की आगे किस तरह भूमिका रहेगी? इन नेताओं में पूव्र मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव जैसे नाम हैं। जानकारों की माने तो इन नेताओं की भूमिका को सीमित किया जा सकता है और मैदानी सक्रियता के आधार पर ही काम लिया जाएगा। अगले ढाई साल में नये नेतृत्व को स्थापित करने का काम तेजी से चलेगा।
पटवारी होंगे मजबूत !
राहुल गांधी के दौरे के बाद इस बात के भी कयास तेजी से लगे है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अब प्रदेश में मजबूत होकर उभरेंगे। उन्हें पार्टी के भीतर मजबूती मिलेगी। राहुल ने संदेश दिया है कि फिलहाल पटवारी ही आगे उनके सृजन अभियान का चेहरा होंगे। अगले चुनाव में टिकट वितरण में जिलाध्यक्ष महत्वपूर्ण भूमिका में आ जाएंगे, अलबत्ता खुद जिलाध्यक्ष टिकट के दावेदार नहीं बन सकेंगे।
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस में संगठन सृजन को लेकर राहुल गांधी द्वारा अपनाई गई नई कार्यशैली और बयानों ने नेताओं की बेचैनी बढ़ा दी है। ’रेस’, ’बारात’ और अब ’लंगड़ा घोड़ा’ जैसे प्रतीकों के जरिये राहुल ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब निष्क्रिय और चुनावी रूप से विफल नेताओं को बख्शा नहीं जाएगा। खासकर वे नेता जो लंबे समय से पद लेकर बैठकों तक सीमित हैं या जो टिकट की दौड़ में तो आगे रहते हैं पर जनता के बीच नजर नहीं आतेकृउनकी मुश्किलें बढ़ना तय है।
राहुल गांधी ने रेस, बारात व लंगड़े घोड़े के अपने पुराने जुमले का प्रदेश में पहली बार उपयोग करके नेताओं को चिंता में डाल दिया है। इसमें लंगड़ा घोड़ा एक नया शब्द उन्होंने गढ़ा है। इसके जरिए लगातार चुनाव हारने वाले या भाजपा को फायदा पहुंचाने वाले काम करके कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहे नेताओं के लिये संकेत छिपा है। राहुल ने भोपाल में कांग्रेस के लगातार बैठकों के दौरान यह भी कहा है कि हमारे मैदानी लोग बहुत अच्छा काम करते हैं, लेकिन दो चार ऐसे नेता होते हैं जो अपनी बयानबाजी से सारा माहौल बिगाड़ देते है, इसका फायदा विरोधी दल को होता है। इस बात के पीछे यह भी संकेत दिया है कि हाल में जिन नेताओं ने आपत्तिजनक टिप्पणी की हैं, उन्हें कार्रवाई के दायरे में लिया जाएगा। जानकार सूत्र बताते हैं कि भोपाल में राहुल के दौरे के बाद अगला एक पखवाड़ा बहुत अहम है, इसमें तेजी से कुछ निर्णय होंगे। वहीं प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों में भी भी घबराहट है कि उनका भविष्य क्या होगा, इनमें कई टिकट के दावेदार हैं और कई पद बचाने की जुगत में हैं। सूत्रों की मानें तो भोपाल बैठक के पहले दिल्ली में प्रदेश के बारे में बारीकी से स्कैनिंग की गई है। इसमें कई नेताओं को उनके चुनावी कॅरियर, बयान आदि की कसौटी से परखा गया है। इसके अलावा निष्ठा के मामले में कम से कम पचास नेताओं को तौला गया है।
दिग्गजों की क्या होगी भूमिका
राहुल गांधी तो प्रदेश में संगठन सृजन का ष्शुभारंभ कर चले गए, मगर अब प्रदेश जब संगठन सृजन को लेकर कांग्रेस नेताओं में ज्यादा चिंता नजर आ रही है। इन्हें अभी से नए संगठन सृजन के आकार की चिंता ज्यादा सता रही है। चर्चा तो यह भी चल पड़ी है कि कांग्रेस के कुछ वरिश्ठ नेताओं की आगे किस तरह भूमिका रहेगी? इन नेताओं में पूव्र मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव जैसे नाम हैं। जानकारों की माने तो इन नेताओं की भूमिका को सीमित किया जा सकता है और मैदानी सक्रियता के आधार पर ही काम लिया जाएगा। अगले ढाई साल में नये नेतृत्व को स्थापित करने का काम तेजी से चलेगा।
पटवारी होंगे मजबूत !
राहुल गांधी के दौरे के बाद इस बात के भी कयास तेजी से लगे है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अब प्रदेश में मजबूत होकर उभरेंगे। उन्हें पार्टी के भीतर मजबूती मिलेगी। राहुल ने संदेश दिया है कि फिलहाल पटवारी ही आगे उनके सृजन अभियान का चेहरा होंगे। अगले चुनाव में टिकट वितरण में जिलाध्यक्ष महत्वपूर्ण भूमिका में आ जाएंगे, अलबत्ता खुद जिलाध्यक्ष टिकट के दावेदार नहीं बन सकेंगे।
