जनजातीय नायकों को सम्मान देने संकल्पित है सरकार
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पचमढ़ी में आज होगी कैबिनेट बैठक
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कल 3 जून मंगलवार को पचमढ़ी के राजभवन में कैबिनेट की बैठक होगी। विरासत से विकास और जनजातीय नायकों को सम्मान देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव और राज्य शासन कृत संकल्पित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास को सामने लाने के लिए विशेष पहल की जा रही है।
कैबिनेट की बैठक विशेष रूप से जनजातीय समाज और शौर्य पराक्रम के प्रतीक रहे राजा भभूत सिंह की स्मृति को समर्पित होगी, जिनकी ऐतिहासिक भूमिका को मंत्रि-परिषद की बैठक के दौरान पुनः स्मरण किया जाएगा। पचमढ़ी गोंड शासक राजा भभूत सिंह के ऐतिहासिक योगदान को समेटे हुए है। उन्होंने इस पहाड़ी भूभाग का उपयोग शासन संचालन, सुरक्षा और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा के लिए किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजा भभूत सिंह छापामार युद्ध नीति में पारंगत होने के कारण नर्मदांचल के शिवाजी कहलाते थे। उन्होंने आदिवासी समाज के साथ-साथ क्षेत्र के सभी वर्ग के लोगों को आंदोलन से जोड़ा था। वे सतपुड़ा के पहाड़ी मार्ग के चप्पे-चप्पे से वाकिफ थे, जबकि अंग्रेज इस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों से परिचित नहीं थे। भभूत सिंह को पकड़ने के लिए ही ब्रिटिश सरकार को मद्रास इन्फेंटरी को बुलाना पड़ा था। दो साल के कड़े संघर्ष के बाद ब्रिटिश सेना राजा भभूत सिंह को गिरफ्तार कर पाई।
गोंड साम्राज्य की रणनीतिक शक्ति को दर्शाता है पचमढ़ी
पचमढ़ी भगवान भोलेनाथ की नगरी के रूप में भी प्रसिद्ध है। पचमढ़ी की धूपगढ़ चोटी समुद्र तल से लगभग 1,350 मीटर (4,429 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है। यह स्थल सतपुड़ा पर्वतमाला का प्रमुख आकर्षण है। धूपगढ़ से दिखाई देने वाला सूर्योदय और सूर्यास्त न केवल पर्यटकों को मंत्रमुग्ध करता है, बल्कि यह स्थल गोंड साम्राज्य की रणनीतिक शक्ति और प्राकृतिक संरक्षण दृष्टिकोण को भी दर्शाता है। पचमढ़ी मध्यप्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन भी है। कैबिनेट बैठक का आयोजन प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यह पचमढ़ी की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत को सम्मानित करने का अवसर है।
समाज को एकजुट कर किया था अंग्रेजों का मुकाबला
पचमढ़ी के राजा भभूत सिंह ने जल, जंगल, जमीन एवं अपने क्षेत्र को बाहरी आक्रांताओं तथा अंग्रेजों से बचाए रखने के लिए समाज को एकजुट कर अंग्रेजी शासन का मुकाबला किया। राजा भभूत सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम के समय महान स्वतंत्रता सेनानी तात्या टोपे की मदद भी की। वे तात्या टोपे के आह्वान पर देश की आजादी की मशाल लेकर सतपुड़ा की सुरम्य वादियों में निकल पड़े। उन्होंने सतपुड़ा की वादियों में आजादी की मशाल जलाई। राजा भभूत सिंह ने अंग्रेजों की आँख में धूल झोंकते हुए अक्टूबर 1858 के अंतिम सप्ताह में तात्या टोपे के साथ ऋषि शांडिल्य की पौराणिक तपोभूमि साँडिया के पास नर्मदा नदी पार की। भभूत सिंह और तात्या टोपे ने नर्मदांचल में आजादी के आंदोलन की योजना बनाई।
कैबिनेट बैठक के बाद होगा सांसद-विधायकों का प्रशिक्षण वर्ग
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार प्रदेश के सभी क्षेत्रों में गरीब, किसान (अन्नदाता), युवा और नारी सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश की वन संपदा और घने जंगलों में टाइगर (बाघ) सहित वन्य जीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वन्य क्षेत्र के संरक्षण में जनजातीय समाज का सराहनीय योगदान रहा है।पचमढ़ी रोजगार और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। मंत्रिपरिषद की बैठक में पचमढ़ी क्षेत्र के विकास के लिए मंथन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विकास के मामले में पहले यहां कई तरह की पाबंदियां थीं, जिन्हें पिछली कैबिनेट में हटाने का कार्य किया गया है। पचमढ़ी एक बार पुनः अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ गौरव प्राप्त करेगी। पचमढ़ी में कैबिनेट बैठक के बाद दूसरे चरण में विधायकों और सांसदों का प्रशिक्षण वर्ग आयोजित होगा।
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कल 3 जून मंगलवार को पचमढ़ी के राजभवन में कैबिनेट की बैठक होगी। विरासत से विकास और जनजातीय नायकों को सम्मान देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव और राज्य शासन कृत संकल्पित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास को सामने लाने के लिए विशेष पहल की जा रही है।
कैबिनेट की बैठक विशेष रूप से जनजातीय समाज और शौर्य पराक्रम के प्रतीक रहे राजा भभूत सिंह की स्मृति को समर्पित होगी, जिनकी ऐतिहासिक भूमिका को मंत्रि-परिषद की बैठक के दौरान पुनः स्मरण किया जाएगा। पचमढ़ी गोंड शासक राजा भभूत सिंह के ऐतिहासिक योगदान को समेटे हुए है। उन्होंने इस पहाड़ी भूभाग का उपयोग शासन संचालन, सुरक्षा और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा के लिए किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजा भभूत सिंह छापामार युद्ध नीति में पारंगत होने के कारण नर्मदांचल के शिवाजी कहलाते थे। उन्होंने आदिवासी समाज के साथ-साथ क्षेत्र के सभी वर्ग के लोगों को आंदोलन से जोड़ा था। वे सतपुड़ा के पहाड़ी मार्ग के चप्पे-चप्पे से वाकिफ थे, जबकि अंग्रेज इस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों से परिचित नहीं थे। भभूत सिंह को पकड़ने के लिए ही ब्रिटिश सरकार को मद्रास इन्फेंटरी को बुलाना पड़ा था। दो साल के कड़े संघर्ष के बाद ब्रिटिश सेना राजा भभूत सिंह को गिरफ्तार कर पाई।
गोंड साम्राज्य की रणनीतिक शक्ति को दर्शाता है पचमढ़ी
पचमढ़ी भगवान भोलेनाथ की नगरी के रूप में भी प्रसिद्ध है। पचमढ़ी की धूपगढ़ चोटी समुद्र तल से लगभग 1,350 मीटर (4,429 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है। यह स्थल सतपुड़ा पर्वतमाला का प्रमुख आकर्षण है। धूपगढ़ से दिखाई देने वाला सूर्योदय और सूर्यास्त न केवल पर्यटकों को मंत्रमुग्ध करता है, बल्कि यह स्थल गोंड साम्राज्य की रणनीतिक शक्ति और प्राकृतिक संरक्षण दृष्टिकोण को भी दर्शाता है। पचमढ़ी मध्यप्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन भी है। कैबिनेट बैठक का आयोजन प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यह पचमढ़ी की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत को सम्मानित करने का अवसर है।
समाज को एकजुट कर किया था अंग्रेजों का मुकाबला
पचमढ़ी के राजा भभूत सिंह ने जल, जंगल, जमीन एवं अपने क्षेत्र को बाहरी आक्रांताओं तथा अंग्रेजों से बचाए रखने के लिए समाज को एकजुट कर अंग्रेजी शासन का मुकाबला किया। राजा भभूत सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम के समय महान स्वतंत्रता सेनानी तात्या टोपे की मदद भी की। वे तात्या टोपे के आह्वान पर देश की आजादी की मशाल लेकर सतपुड़ा की सुरम्य वादियों में निकल पड़े। उन्होंने सतपुड़ा की वादियों में आजादी की मशाल जलाई। राजा भभूत सिंह ने अंग्रेजों की आँख में धूल झोंकते हुए अक्टूबर 1858 के अंतिम सप्ताह में तात्या टोपे के साथ ऋषि शांडिल्य की पौराणिक तपोभूमि साँडिया के पास नर्मदा नदी पार की। भभूत सिंह और तात्या टोपे ने नर्मदांचल में आजादी के आंदोलन की योजना बनाई।
कैबिनेट बैठक के बाद होगा सांसद-विधायकों का प्रशिक्षण वर्ग
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार प्रदेश के सभी क्षेत्रों में गरीब, किसान (अन्नदाता), युवा और नारी सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश की वन संपदा और घने जंगलों में टाइगर (बाघ) सहित वन्य जीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वन्य क्षेत्र के संरक्षण में जनजातीय समाज का सराहनीय योगदान रहा है।पचमढ़ी रोजगार और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। मंत्रिपरिषद की बैठक में पचमढ़ी क्षेत्र के विकास के लिए मंथन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विकास के मामले में पहले यहां कई तरह की पाबंदियां थीं, जिन्हें पिछली कैबिनेट में हटाने का कार्य किया गया है। पचमढ़ी एक बार पुनः अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ गौरव प्राप्त करेगी। पचमढ़ी में कैबिनेट बैठक के बाद दूसरे चरण में विधायकों और सांसदों का प्रशिक्षण वर्ग आयोजित होगा।
