संगठन सृजन कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे राहुल गांधी 3 जून को
भोपाल। कांग्रेस नेता राहुल गांधी 3 जून को भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (पीसीसी) में ‘संगठन सृजन कार्यक्रम’ का उद्घाटन करेंगे। राजधानी प्रवास के दौरान राहुल गांधी राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में शामिल होंगे और मौजूदा जिला कांग्रेस अध्यक्षों से भी मुलाकात करेंगे।
हाल ही में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने जिला कांग्रेस अध्यक्षों के चुनाव के लिए 50 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षकों के सहयोग के लिए मप्र-प्रदेश कांग्रेस कमेटी भी कम से कम चार पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करने जा रही है। चूंकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी की नियुक्ति के बाद से नए जिला अध्यक्षों के चुनाव अभी लंबित हैं। पटवारी ने बताया कि 3 जून को राहुल गांधी राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में शामिल होंगे और मौजूदा जिला कांग्रेस अध्यक्षों से भी मुलाकात करेंगे। बाद में वह पार्टी के सभी शीर्ष नेताओं की उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम पार्टी को नई ताकत और ऊर्जा देगा। संगठन सृजन कार्यक्रम से पार्टी में संरचनात्मक सुधार और जमीनी स्तर पर नेतृत्व को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी और राहुल गांधी की प्रत्यक्ष भागीदारी के साथ, इस कार्यक्रम को भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पार्टी पदाधिकारियों का मानना है कि इस पहल से आंतरिक समन्वय मजबूत होगा और मध्य प्रदेश के जिलों में एक मजबूत संगठनात्मक ढांचा बनाने में मदद मिलेगी।
बैठक नहीं, है एक विचार यात्रा
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यह आयोजन केवल एक बैठक नहीं, बल्कि एक विचार यात्रा का प्रारंभ है। यह कांग्रेस की जड़ों को और गहरा करेगा और आगामी चुनावों में संगठन को मजबूती के साथ मैदान में उतारेगा। “उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संगठन सृजन अभियान के माध्यम से बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की आवाज को बुलंद किया जाएगा और उनकी मेहनत को संगठन के शीर्ष स्तर तक पहुँचाया जाएगा।
जमीन पर कुछ नहीं बदला
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नरेंद्र मोदी 31 मई को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल आ रहे हैं। उनका स्वागत है, लेकिन, यह स्वागत सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं है। यह अवसर है उन सवालों को उठाने का, जो मध्यप्रदेश की बेटियों, माताओं और बहनों के मन में सालों से दबे हुए हैं। यह सवाल सिर्फ मेरे नहीं, बल्कि उन लाखों महिलाओं के हैं, जिनकी आवाज़ को बार-बार दबाया गया है। यह सवाल उस दर्द का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो हर दिन हमारी बहन-बेटियां झेल रही हैं। यह सवाल उस व्यवस्था की नाकामी को उजागर करते हैं, जो महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें तो करती है, लेकिन ज़मीन पर कुछ भी बदलता नहीं दिखता।
