प्राध्यापकों की कमी के चलते अतिथि विद्वानों के भरोसे कॉलेज
शिक्षण सत्र भी हो रहे विलंब से शुरू, पढ़ाई पर पढ़ रहा असर
भोपाल। प्रदेश के अधिकांश कॉलेजों में प्राध्यापकों की कमी के चलते अतिथि विद्वानों के भरोसे पढ़ाई कराई जा रही है। शैक्षणिक सत्र भी देरी से शुरू हो रहे हैं, जिसके चलते विश्वविद्यालयों से संबंध कॉलेजों में ना तो परीक्षाएं समय पर आयोजित की जा रही है और ना ही परीक्षा परिणाम भी समय पर आ रहे हैं।
राज्य के सत्रह विश्वविद्यालयों से संबंद्ध करीब छह सौ कालेजों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चौपट होती जा रही है। लंबे समय से सहायक प्राध्यपकों की भर्ती ना होने के कारण कॉलेजों में पढ़ाई पर बुरा असर पढ़ा है। कॉलेजों में पढ़ाई के लिए प्राध्यापकों की जगह अतिथि विद्वानों की सेवाएं ली जा रही है। शैक्षणिक सत्र भी देरी से शुरू हो रहे हैं। विश्वविद्यालय न तो समय पर परीक्षाएं आयोजित करवा पा रहे हैं और न ही परिणाम घोषित कर पा रहे हैं। इसका खामियाजा छात्रों को भोगना पड़ रहा है। कॉलेज पूरी तरह अतिथि विद्वानों के भरोसे रह गए हैं। उच्च शिक्षा विभाग हर साल नियुक्ति करने की कवायद तो करता है, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं आता है। इस कारण कॉलेज आज अतिथि विद्वानों पर पूरी तरह से निर्भर हो गए हैं। इसके चलते सत्र विलंब से ष्शुरू होता आ रहा है जिसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पढ़ रहा है।
बता दें कि प्रदेश में सरकार के पारंपरिक पाठ्यक्रमों के सत्रह विश्वविद्यालय संचालित हैं। इनसे संबंधित लगभग छह सौ सरकारी और निजी कॉलेजों में करीबन 1949 स्वीकृत पदों में से 1585 प्राध्यापक, सह प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक के पद खाली हैं। यानी मात्र 364 प्राध्यापक की पदस्थ हैं, जबकि यहां विद्यार्थियों के पूरे प्रवेश हैं। हालांकि कुलसचिवों ने भर्ती प्राध्यापकों की करने के लिए विज्ञापन तो जारी किया, लेकिन बाद में भर्ती निरस्त कर दिया। इस कारण अतिथि विद्वानों के भरोसे पढ़ाई चल रही है।
