तेरह हजार अतिथि शिक्षकों पर मंडराया संकट
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भोपाल। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 7 अगस्त तक अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति हो जाएगी। इसके लिए जल्द ही आदेश जारी किया जाएगा। हालांकि इस बार 25 हजार अतिथि शिक्षकों की नौकरी पर संकट दिखाई दे रहा है। खासकर खराब रिजल्ट के कारण 13 हजार अतिथि शिक्षकों की नौकरी जाएगी। वहीं उच्च पद प्रभार, ट्रांसफर और भर्ती के कारण 12 हजार अतिथि शिक्षकों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
दरअसल पूर्व में लोक शिक्षा विभाग की तरफ से एक पत्र जारी किया गया था, जिसके बाद से मध्य प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है। जारी किए गए पत्र में 30 फीसदी से कम रिजल्ट लाने वाले अतिथि शिक्षकों को नौकरी पर न रखे जाने की बात कही गई थी। बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम बिगड़ने के बाद सरकार ने अधिकारियों से इसके पीछे का कारण पूछा था, जिसके बाद स्कूल प्रिंसिपल्स ने इसके पीछे का कारण अतिथि शिक्षकों को बताया है। यही कारण है कि कि नियुक्ति प्रक्रिया में कई शिक्षकों की नौकरी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
इन कारणों के चलते छाया है संकट
शासन ये पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि 30 प्रतिशत भी रिजल्ट नहीं देने वाले अतिथि शिक्षकों को दोबारा नहीं रखा जाएगा। इससे 13 हजार की नौकरी जाना तय माना जा रहा है। उच्च पद प्रभार की भी प्रक्रिया चल रही है। इसमें 20 हजार से ज्यादा नियमित शिक्षक इधर से उधर होंगे। इससे करीब 1 हजार अतिथि शिक्षकों को दिक्कत आ सकती है। जब तबादले शुरू होंगे तब भी तबादला होकर शिक्षक दूसरे स्कूलों में पदस्थ होंगे। इसमें करीब 3 हजार अतिथियों की नौकरी पर संकट आएगा। वर्ग 1 शिक्षक भर्ती की 8 हजार से अधिक पदों के लिए चल रही है। इनके नियुक्ति पत्र जारी होते ही 8 हजार अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति पर खतरा आ जाएगा।
दरअसल पूर्व में लोक शिक्षा विभाग की तरफ से एक पत्र जारी किया गया था, जिसके बाद से मध्य प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है। जारी किए गए पत्र में 30 फीसदी से कम रिजल्ट लाने वाले अतिथि शिक्षकों को नौकरी पर न रखे जाने की बात कही गई थी। बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम बिगड़ने के बाद सरकार ने अधिकारियों से इसके पीछे का कारण पूछा था, जिसके बाद स्कूल प्रिंसिपल्स ने इसके पीछे का कारण अतिथि शिक्षकों को बताया है। यही कारण है कि कि नियुक्ति प्रक्रिया में कई शिक्षकों की नौकरी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
इन कारणों के चलते छाया है संकट
शासन ये पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि 30 प्रतिशत भी रिजल्ट नहीं देने वाले अतिथि शिक्षकों को दोबारा नहीं रखा जाएगा। इससे 13 हजार की नौकरी जाना तय माना जा रहा है। उच्च पद प्रभार की भी प्रक्रिया चल रही है। इसमें 20 हजार से ज्यादा नियमित शिक्षक इधर से उधर होंगे। इससे करीब 1 हजार अतिथि शिक्षकों को दिक्कत आ सकती है। जब तबादले शुरू होंगे तब भी तबादला होकर शिक्षक दूसरे स्कूलों में पदस्थ होंगे। इसमें करीब 3 हजार अतिथियों की नौकरी पर संकट आएगा। वर्ग 1 शिक्षक भर्ती की 8 हजार से अधिक पदों के लिए चल रही है। इनके नियुक्ति पत्र जारी होते ही 8 हजार अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति पर खतरा आ जाएगा।
