निकाय और पंचायत चुनाव से पहले बढ़ सकती है सख्ती
समीक्षा बैठक के बाद रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी
भोपाल। प्रदेश में मंत्रियों के कामकाज को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा संगठन द्वारा की गई समीक्षा के बाद एक बड़ी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को दिल्ली भेज दी गई है। इस रिपोर्ट में मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में रात्रि विश्राम न करने को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को देखते हुए संगठन इस ढिलाई पर गंभीर है। माना जा रहा है कि दिल्ली से हरी झंडी मिलते ही मंत्रियों के लिए नियम और कड़े किए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश संगठन द्वारा मंत्रियों की वन-टू-वन परफॉर्मेंस के आधार पर यह गोपनीय रिपोर्ट तैयार की गई है। इसे भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को भेज दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व इस रिपोर्ट के आधार पर ढिलाई बरतने वाले मंत्रियों को जल्द ही सख्त हिदायत जारी कर सकता है। रिपोर्ट में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह यह है कि अधिकांश मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों का दौरा तो कर रहे हैं, लेकिन वहां रात रुकने से कतरा रहे हैं।
रात्रि विश्राम करना था अनिवार्य
प्रभार सौंपते समय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और संगठन ने यह अनिवार्य किया था कि सभी मंत्रियों को महीने में कम से कम एक रात अपने प्रभार वाले जिले में बितानी होगी। रात्रि विश्राम के पीछे उद्देश्य यह था कि स्थानीय कार्यकर्ताओं और जमीनी नेताओं से सीधा संवाद स्थापित करना, आम जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक ग्राउंड फीडबैक लेना।
चुनाव के मद्देनजर अब नियम होंगे और कड़े
भाजपा संगठन अब आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारियों में पूरी तरह जुट गया है। चुनाव में किसी भी तरह की लापरवाही से बचने के लिए संगठन मंत्रियों की सक्रियता को चरम पर देखना चाहता है। सूत्रों का दावा है कि दिल्ली से निर्देश मिलते ही रात्रि विश्राम के नियमों को और सख्त किया जाएगा। मंत्रियों को अब महीने में एक रात की जगह दो रातें अनिवार्य रूप से प्रभार वाले जिलों में गुजारने के कड़े निर्देश दिए जा सकते हैं, ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया जा सके और चुनावी जमीन को मजबूत किया जा सके।
